
परिवहन विभाग को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अलवर के शामिल होने का दंश झेलना पड़ रहा है। पुराने वाहनों का नवीनीकरण शून्य और कमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन कम होने की वजह से राजस्व लगातार कम होता जा रहा है। हालत यह है कि कभी अलवर राजस्व के मामले में पांचवें स्थान पर आता था, लेकिन अब 11वें या 12वें स्थान पर रहता है।
दरअसल, अलवर में डीजल के 10 साल और पेट्रोल के 15 से ज्यादा पुराने वाहनों का संचालन नहीं हो पाता है। यही वजह है कि वाहन का रजिस्ट्रेशन खत्म होते ही उसके मालिक को दूसरे जिले के परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। यह कमाई अलवर के हाथों खिसक रही है। यहां पाबंदी के कारण कोटपूतली और दौसा परिवहन कार्यालयों को लाभ हो रहा है। वाहन मालिक नजदीकी जिलों के आरटीओ से आसानी से दोबारा रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं।
अलवर के परिवहन विभाग को निजी वाहनों के रजिस्ट्रेशन से ही मुनाफा हो रहा है। एक साल में यहां करीब 80 हजार दुपहिया व चोपहिया वाहनों की बिक्री होती है। इस बिक्री के जरिए ही विभाग को राजस्व मिल रहा है। कुछ संख्या कमर्शियल वाहनों की भी है। कोटपूतली जैसे छोटे क्षेत्र में भी रजिस्टर्ड कमर्शियल वाहनों की संख्या 20 हजार है, जबकि अलवर में यह संख्या महज 5500 के आसपास ही है। यही कारण है कि अलवर परिवहन कार्यालय को लगातार राजस्व का नुकसान हो रहा है।
अलवर में एनसीआर के नियमों के चलते बीएस-6 वाहनाें की बिक्री होती है। एनसीआर में इस श्रेणी के वाहनों को ही संचालन की अनुमति है। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण की वजह से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएमक्यूएम) दिल्ली में बीएस-4 मानक के डीजल चालित कमर्शियल (मालवाहक और यात्री) वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। जो अक्टूबर से लगने की उम्मीद है। पिछले साल इसकी एंट्री को चालू किया गया था।
एनसीआर की वजह से यहां पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण नहीं होता है। यही वजह है कि यहां के वाहनों को दूसरे जिलों में जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है - रविंद्र जोशी, आरटीओ, अलवर