
Alwar Waste to Energy Plant: अलवर शहर को जल्द ही कचरे से मुक्ति मिलने वाली है। जयपुर के बाद अलवर प्रदेश का दूसरा शहर बन जाएगा, जहां कचरे से बिजली बनेगी। इसके लिए नगर निगम वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने जा रहा है, जो प्रतिदिन 12 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगा, जिसकी सप्लाई आसपास के एरिया में होगी, जिससे रोशनी होगी।
इसका प्रस्ताव नगर निगम ने प्रदेश सरकार को भेजा है। माना जा रहा है कि 12 मेगावाट बिजली प्रतिदिन बनाने के लिए करीब 1 हजार टन कचरा चाहिए। इस गति से कचरा बिजली में बदला तो कचरे का पहाड़ कुछ ही साल में खत्म हो जाएगा।
जयपुर में वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट का संचालन नगर निगम की ओर से किया जा रहा है। इसमें एक एजेंसी ने 350 करोड़ रुपए खर्च किए और काम शुरू कर दिया। उसी तर्ज पर अलवर में भी अब कचरे से बिजली बनाई जाएगी। जयपुर में पहला प्लांट है और दूसरा प्लांट अलवर में लगेगा। हालांकि इसके लिए प्रदेश सरकार के बाद केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी है।
नगर निगम ने अग्यारा में कचरा निस्तारण प्लांट स्थापित किया है। यहां के परिसर में 5 लाख टन से अधिक कचरा एकत्र है। इसका निस्तारण करने के लिए प्लांट लगाया गया, लेकिन कुछ ही माह काम कर पाया। वर्तमान में नगर निगम ही इसका संचालन कर काम चला रहा है, लेकिन पूरे कचरे का निस्तारण इस प्रक्रिया से संभव नहीं है। इसे देखते हुए कचरे से बिजली बनाने की योजना बनाई गई।
नगर निगम के अनुसार 12 मेगावाट बिजली से 4 हजार से अधिक घर रोशन हो सकेंगे। ऐसे में अग्यारा के आसपास के इलाके के अलावा शहर तक बिजली सप्लाई हो सकेगी। यह निगम का बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। गौरतलब है कि अलवर एनसीआर में आता है।
ऐसे में यहां कचरे का निस्तारण शत-प्रतिशत जरूरी माना गया है। उधर, नगर निगम की ओर से 10 साल पहले लगाया गया कचरा निस्तारण प्लांट चलता रहेगा। उसका असर इस प्रोजेक्ट पर नहीं आएगा। यह इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा होगा, जिस पर करीब 15 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
12 मेगावाट वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। यह अपने में अलग प्रोजेक्ट है, जो जयपुर के बाद यहां लॉन्च होगा। जैसे ही इसे मंजूरी मिलेगी, इस पर काम शुरू कर देंगे - सोहन सिंह नरूका, आयुक्त, नगर निगम