
अलवर में पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता के दौरान सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला प्रमुख बलबीर छिल्लर पर आरोप है कि आचार संहिता लागू होने के बाद भी उन्होंने करीब 11 दिन तक जिला परिषद की सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल किया। शिकायत सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से पूरी रिपोर्ट मांगी है।
चुनाव की आचार संहिता 19 अगस्त को लागू हुई थी। आरोप है कि इसके बाद भी जिला प्रमुख को आवंटित सरकारी वाहन उनके उपयोग में रहा। बताया गया है कि यह सरकारी गाड़ी करीब 11 दिन तक इस्तेमाल की गई और बाद में 31 अगस्त को जिला परिषद कार्यालय में जमा कराई गई। अब निर्वाचन विभाग पूरे मामले में यह पता लगाने में जुटा है कि आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी वाहन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया।
आचार संहिता प्रभारी बीना महावर ने जिला परिषद के सीईओ को पत्र भेजकर मामले से जुड़ी जानकारी और रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी वाहन के इस्तेमाल को लेकर नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और आगे किस तरह की कार्रवाई की जानी है।
इसी बीच अलवर जिला परिषद में कार्यरत सहायक विकास अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल को लेकर भी निर्वाचन विभाग ने रिपोर्ट मांगी है। राज्य निर्वाचन आयुक्त की ओर से जिला कलक्टर से इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद निर्वाचन विभाग ने जिला परिषद के सीईओ से संबंधित अधिकारी के बारे में रिपोर्ट तलब की है।
शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि ब्रजेश कुमार पटेल वर्ष 2016 से लगातार जिला परिषद में पदस्थापित हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उनका मूल निवास मालाखेड़ा क्षेत्र में है।
शिकायतकर्ता ने लंबे समय से एक ही जिले में पदस्थापित रहने को लेकर सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि पंचायती राज चुनाव में संबंधित अधिकारी किसी तरह से चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसी शिकायत के आधार पर निर्वाचन विभाग ने मामले में तथ्य जुटाने शुरू किए हैं। अब दोनों मामलों में संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल निर्वाचन विभाग ने रिपोर्ट तलब कर मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।