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अटल बिहारी वायपेयी को अलवर से था खास लगाव, यहां जानिए अटलजी की अलवर से जुड़ी यादें

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Aug 17, 2018
Atal Bihari Vajpayee Connection With Alwar
अटल बिहारी वायपेयी को अलवर से था खास लगाव, यहां जानिए अटलजी की अलवर से जुड़ी यादें

अलवर. पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी का अलवर से गहरा लगाव रहा। वे जीवनकाल के दौरान कई मौकों पर अलवर आए। चुनावी सभा में उनका हाजिर जवाब भाषण अब भी जिले के लोगों के मन में रचा बसा है। उनके गुरुवार शाम निधन की सूचना मिलने पर लोगों में मायूसी छा गई

भाजपा जिलाध्यक्ष पं. धर्मवीर शर्मा बताते हैं कि वाजपेयी का अलवर आना जाना अस्सी के दशक से रहा। वर्ष 1984 के चुनाव में अलवर आए और केड़लगंज मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किया। बाद में वे वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में अलवर आए। उस दौरान वाजपेयी ने कम्पनी बाग में भाजपा प्रत्याशी महेन्द्र कुमारी के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित किया। इस दौरे की खास बात यह रही कि वे सभा में देरी से पहुंचे। उन्होंने अपने देरी से पहुंचने की पीड़ा कुछ इस तरह व्यकत की, अपने भाषण की शुरुआत करते हुए वाजपेयी ने कहा कि सुना है इंतजार में बहुत मजा है, आपको इंतजार में कितना मजा आया, मैं नहीं जानता। इस पर लोगों की हंसी फूट पड़ी। इस दौरान उन्होंने मोती डूंगरी के समीप सर्राफ सिंटेकस के गेस्ट हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं से साथ भोजन भी किया।

शर्मा बताते हैं कि उस दौरान उन्होंने उनके दो मिनट के भाषण पर जो पीठ थपथपाई वह उनके जीवन का अनुपम उपहार है। वहीं पूर्व विधायक जीतमल जैन बताते हैं कि वाजपेयी सहृदय नेता थे। वे उनके चुनाव में सभा करने अलवर आए। उस दौरान वे पुराने शहर स्थित एक गली में स्थित उनके छोटे से मकान में भोजन करने पहुंचे। जैन ने बताया कि अलवर की जनता में उनके प्रति इतना स्नेह था कि अलवर आगमन पर उनके सम्मान में राशि एकत्र की गई तो लोगों ने खुद आगे चलकर उन्हें भेंट करने के लिए राशि दी। इस तरह 2 लाख 55 हजार की राशि एकत्र हुई, जिसे सभा के दौरान वाजपेयी को पार्टी के लिए राशि भेंट की गई।

उधर, श्रम मंत्री डॉ. जसवंत यादव बताते हैं कि वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान वाजपेयी उनके समर्थन में कम्पनी बाग में सभा करने आए थे। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष संजय शर्मा बताते हैं कि चुनावी मौकों के अलावा भी वाजपेयी एक बार अलवर आए। शहर के व्यापारिक संगठनों की ओर से वाजपेयी का कम्पनी बाग में अभिनंदन समारोह किया गया।

इस दौरान उन्होंने तत्कालीन जिला कलकटर दीपक उप्रेती से कहकर स्मृति चिह्न के रूप में प्रतिमा भेंट। इस दौरान उन्होंने मजाकिया लहजे में पीठ पर थप्पी मारते हुए कहा कि कितनी फोटो खिंचवाओगे और वहीं मंच पर अपने पीछे बिठा लिया। इसके अलावा भी बहुत से लोगों की यादें वाजपेयी से जुड़ी हैं।

Published on:
17 Aug 2018 09:25 am