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बीकानेर से ‘अटल’ प्रेम, राजनीतिक जीवन काल में पांच बार आए बीकानेर

अटल बिहारी वाजपेयी अपने राजनीतिक जीवन काल में पांच बार बीकानेर आए।
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बीकानेर

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dinesh kumar swami

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Updated: 17 Aug 2018, 8:56 AM IST

Atal Bihari Vajpayee

Atal Bihari Vajpayee

बीकानेर. अटल बिहारी वाजपेयी अपने राजनीतिक जीवन काल में पांच बार बीकानेर आए। पहली बार १९५३ में देशभर की यात्रा के दौरान तथा अंतिम बार २००३ में प्रधानमंत्री के रूप में बीकानेर आए। वैसे बीकानेर की गहरी छाप उनके मन पर हमेशा रही। उन्हें बीकानेर के भुजिया और रसगुल्ले पसंद थे । जब बीकानेर से कोई भी परिचित नेता उनसे मिलने दिल्ली जाते तो वे अक्सर कहते आओ बीकानेरी और भुजिया-रसगुल्ला को जरूर याद करते ।

वाजपेयी की बीकानेर में पहली सभा दांती बाजार में १९५३ में हुई। श्याम प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय मृत्यु के मु²े पर देश के सामने सच रखने के लिए की यात्रा के दौरान यहां आए। पुराने शहर के दांती बाजार में जनसभा हुई। इसके बाद १९७१ में जन संघ के विधानसभा प्रत्याशी भंवर लाल कोठारी के समर्थन में सभा को सम्बोधित करने वाजपेयी आए। चुनावी सभा जूनागढ़ के पीछे हुई। मंच पर आते ही वाजपेयी ने तीन घंटे विलम्ब से आने का कारण बताया। उन्होंने कहा विलम्ब से पहुंचने का कारण सड़कें और सरकारी गाड़ी है। उस समय वे प्रतिपक्ष के नेता थे और सरकारी गाड़ी मिली हुई। इस वाक्य से सभा में ठहाका लगा और इन्तजार का गुस्सा ठंडा पड़ गया ।

वाजपेयी भाजपा संगठन के बुलावे पर १९८२ में यहां फोर्ट स्कूल मैदान में जन सभा को सम्बोधित करने भी आए। सभा में उन्हें १ लाख ५१ हजार की थैली भेंट की गई। इस बार वे शिवबाड़ी स्थित लालेश्वर महादेव मंदिर भी गए। वर्ष १९९४ के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी गिरधारी लाल भोबिया के समर्थन में चुनावी सभा को सम्बोधित करने वाजपेयी फिर बीकानेर आए। जूनागढ़ के सामने हजारों की भीड़ को वाजपेयी ने सम्बोधित किया । आखिरी बार वाजपेयी प्रधानमंत्री के रूप में २००३ में बीकानेर आए। वसुंधरा राजे के साथ करणी सिंह स्टेडियम में चुनाव सभा को सम्बोधित किया ।