
गंगाशहर का अनूठा शिवधाम
एक ही परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंग, शिव-शक्ति, अर्धनारीश्वर सहित अनेक दुर्लभ स्वरूप
लोगो सावन का सत्कार..................
गंगाशहर. नोखा रोड स्थित रेल दादाबाड़ी के पीछे शांत वातावरण में बना एक अनूठा शिव मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित 11 फीट ऊंची अर्धनारीश्वर महादेव की प्रतिमा, पारे (पारद) से निर्मित शिवलिंग, शिव-शक्ति प्रतिमा तथा द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और अभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं।
इन प्रतिमाओं का निर्माण करने वाले 76 वर्षीय मूर्तिकार सत्यनारायण तंवर बताते हैं कि अर्धनारीश्वर की इतनी विशाल प्रतिमा और पारद से निर्मित इतना बड़ा शिवलिंग राजस्थान में विरले ही देखने को मिलता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, इन स्वरूपों के दर्शन और पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पेशे से प्लंबर रहे तंवर ने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के पिछले करीब 25 वर्षों में अपने श्रम और लगन से मंदिर परिसर का स्वरूप तैयार किया। उनका कहना है कि पारद शिवलिंग की पूजा के लिए लोगों को भटकते देखकर उन्होंने सभी प्रमुख शिव स्वरूपों को एक ही परिसर में स्थापित करने का संकल्प लिया।
45 किलो पारे से बना शिवलिंग
तंवर के अनुसार शिवलिंग के निर्माण में करीब 45 किलोग्राम पारा उपयोग में लिया गया। इसकी ऊंचाई जमीन से लगभग आठ इंच ऊपर तथा तीन इंच नीचे है। उनका कहना है कि पारे को स्थिर रूप देना अत्यंत कठिन कार्य होता है। इसके लिए उन्होंने वर्षों पहले एक परिचित के माध्यम से पाकिस्तान से विशेष रसायन 'केलियाकंद' मंगवाया था, जिसकी सहायता से पारद को स्थायी रूप देकर शिवलिंग तैयार किया गया।
एक ही परिसर में अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं
मंदिर में अर्धनारीश्वर, पारद शिवलिंग और शिव-शक्ति प्रतिमा के अलावा गणपति, काली माता, काला-गोरा भैरव, शनि भगवान, लोकदेवता बाबा रामदेव, पवनपुत्र हनुमान तथा कुलदेवी सहित अनेक विशाल प्रतिमाएं स्थापित हैं। तंवर का दावा है कि इन सभी प्रतिमाओं का निर्माण उन्होंने स्वयं अपने हाथों से किया है और इसके लिए किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं ली।
Updated on:
04 Aug 2026 06:00 am
Published on:
04 Aug 2026 06:00 am
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