अलवर

B.Ed. पास युवक ने नौकरी छोड़कर शुरू की खेती, आज हर महीने कमा रहे लाखों रुपए, अलवर के उद्यानिकी विभाग ने किया सम्मानित

अलवर के किसान किशन मुकेरिया ने अध्यापन की नौकरी छोड़ आधुनिक खेती को अपना कॅरियर बनाया। पॉली हाउस, सोलर पंप और गोबर गैस संयंत्र जैसी तकनीकों के सहारे वे एक एकड़ से सालाना 12 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रहे हैं।

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Jun 08, 2026
Alwar Motivational Story
पॉली हाउस में फार्म पौंड और ​किशन मुकेरिया की फोटो: पत्रिका

Real Life Motivational Story: पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश युवा नौकरी की ओर कदम बढ़ाते हैं, लेकिन जिले के ग्राम गूजूकी निवासी किसान किशन मुकेरिया ने खेती को ही अपना कॅरियर बनाया। निजी विद्यालय में करीब चार वर्ष तक अध्यापन कराने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ आधुनिक खेती का रास्ता चुना। आज उनकी पहचान जिले के प्रगतिशील और नवाचारी किसानों में होती है।

स्नातक एवं बीएड शिक्षित किशन ने उद्यानिकी विभाग के सहयोग और अनुदान से एक एकड़ क्षेत्र में पॉली हाउस और शेडनेट हाउस स्थापित किया। वैज्ञानिक तकनीकों और संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) को अपनाकर उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया। वर्तमान में वे पॉली हाउस में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं।

खेत को बनाया आधुनिक कृषि प्रयोगशाला

किशन के फार्म पर केवल पॉली हाउस ही नहीं, बल्कि शेडनेट हाउस, सोलर पंप, फार्म पॉन्ड और गोबर गैस संयंत्र जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मौजूद हैं। इन संसाधनों के जरिए उन्होंने खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने का सफल मॉडल विकसित किया है। फार्म पॉन्ड से सिंचाई के लिए पानी का संरक्षण किया जाता है, जबकि सोलर पंप से बिजली खर्च में कमी आई है। गोबर गैस संयंत्र और जैविक खाद के उपयोग से खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है।

गोबर गैस से खत्म की रसोई गैस की चिंता

किशन ने अपने फार्म पर गोबर गैस संयंत्र लगाकर इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। संयंत्र से प्रतिदिन करीब छह घन मीटर गैस का उत्पादन होता है, जिससे 20 से 25 लोगों का भोजन तैयार किया जा सकता है। परिवार में केवल पांच से छह सदस्य होने के बावजूद गैस की पर्याप्त उपलब्धता रहती है। इससे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई है। संयंत्र से निकलने वाले अवशेष का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जाता है, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ी है और रासायनिक खाद पर खर्च कम हुआ है।

एक एकड़ से 12 लाख की सालाना आय

आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप किशन को एक एकड़ पॉली हाउस से प्रतिवर्ष करीब 12 लाख रुपए की कमाई हो रही है। उनकी सफलता ने क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं को भी प्रेरित किया है। खेती में किए गए नवाचारों और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उद्यानिकी विभाग ने उन्हें जिला स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया है।

Updated on:
08 Jun 2026 09:29 am
Published on:
08 Jun 2026 09:26 am