
Jaipur Internet Ban - AI Image
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार 8 जून 2026 को इतिहास में पहली बार अतिक्रमण हटाने के नाम पर इंटरनेट बंदी की गई। दरअसल, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की ओर से जयपुर के उपनगरीय और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों- जगतपुरा और मालवीय नगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों और पुराने कब्जों को ध्वस्त करने का एक अभियान चलाया। यही वजह है कि पहली बार किसी अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए शहर के एक बहुत बड़े हिस्से में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद करना पड़ा।
प्रशासन को इस बात की पूरी आशंका थी कि इस बड़ी तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान कुछ असामाजिक तत्व माहौल को खराब करने का प्रयास कर सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जयपुर पुलिस कमिश्नर की लिखित सिफारिश पर जयपुर के संभागीय आयुक्त सरवण कुमार ने एहतियातन तौर पर Netbandi करने के सख्त आदेश जारी किए थे।
जयपुर में इंटरनेट बंद करने के पीछे के वास्तविक कारणों का विश्लेषण करें तो यह पूरी तरह से धार्मिक, संवेदनशीलता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ मामला है। दरअसल, जेडीए द्वारा जगतपुरा इलाके में यातायात को सुगम बनाने के लिए नंदपुरी रोड को 80 फीट चौड़ा करने का एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट काफी समय से लंबित चल रहा था। इस सड़क सीमा के भीतर वर्तमान में करीब 134 अवैध पक्के निर्माण और अतिक्रमण आ रहे थे, जिन्हें हटाया जाना बेहद जरूरी था।
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन 134 अवैध निर्माणों के भीतर 5 ऐसी संरचनाएं भी शामिल थीं जो स्थानीय धार्मिक स्थलों और आस्था के केंद्रों से जुड़ी हुई थीं। इस प्रकार की धार्मिक संरचनाओं को हटाने के दौरान अक्सर जनभावनाएं तेजी से भड़क उठती हैं और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
प्रशासन जानता था कि आज के डिजिटल युग में किसी भी छोटी सी घटना का गलत वीडियो बनाकर यदि सोशल मीडिया पर डाल दिया जाए, तो वह पूरे शहर की शांति को मिनटों में भंग कर सकता है। इसी धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए और किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव को पनपने से पहले ही रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट को बंद करने का यह कड़ा फैसला लिया गया था।
जयपुर जिला और पुलिस प्रशासन के पास खुफिया तंत्र के माध्यम से यह साफ सूचना थी कि जेडीए के इस बड़े बुलडोजर एक्शन के शुरू होते ही कुछ उपद्रवी तत्व सक्रिय हो सकते हैं। ये तत्व व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक और भड़काऊ वीडियो, पुरानी तस्वीरें या भड़काऊ संदेश प्रसारित करके सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की गहरी साजिश रच सकते हैं।
इंटरनेट बंद हो जाने के कारण अब ऐसे असामाजिक तत्व किसी भी प्रकार का लाइव वीडियो या डिजिटल सामग्री बड़े समूहों में फॉरवर्ड नहीं कर पा रहे हैं। संभागीय आयुक्त के आदेशानुसार, इंटरनेट बंद करने का मुख्य उद्देश्य ही अफवाहों के पंख काटना है ताकि धरातल पर काम कर रहे जेडीए के दस्ते और प्रशासनिक अधिकारियों को बिना किसी बाधा के अपनी विधिक कार्रवाई पूरी करने का सुरक्षित माहौल मिल सके।
इस आदेश के तहत जयपुर उत्तर और जयपुर पूर्व जिलों के कुल 34 पुलिस थाना क्षेत्रों में सभी निजी और सरकारी टेलीकॉम कंपनियों की 2G, 3G, 4G और 5G मोबाइल इंटरनेट सेवाएं, बल्क एसएमएस (Bulk SMS) और सभी प्रकार के सोशल मीडिया ऐप्स को पूरी तरह से ब्लॉक किया गया था। 34 प्रमुख थाना क्षेत्रों की सूची।
हालांकि, आम जनता को बैंकिंग, वर्क फ्रॉम होम और आवश्यक डिजिटल कार्यों में ज्यादा परेशानी न हो, इसके लिए ब्रॉडबैंड (Broadband) इंटरनेट और घरों व दफ्तरों में चलने वाले फिक्स्ड वाई-फाई (Wi-Fi) कनेक्शनों को इस पाबंदी से पूरी तरह मुक्त रखा गया था। साथ ही सामान्य वॉयस कॉलिंग (Voice Calls) सेवा भी सुचारू रूप से काम कर रही थी। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर और झालाना डूंगरी के आसपास का विशिष्ट क्षेत्र भी इस प्रतिबंध से बाहर था।
जेडीए की इस बुलडोजर कार्रवाई को किसी भी प्रकार के राजनीतिक या सामाजिक विरोध से बचाने के लिए जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे शहर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (जो पूर्व में सीआरपीसी की धारा 144 के रूप में जानी जाती थी) को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया था।
इसके अतिरिक्त, बिना सक्षम प्रशासनिक अधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी प्रकार का धरना, प्रदर्शन, विरोध रैली, मार्च या जनसभा आयोजित करने पर पूर्ण प्रतिबंध था। धारा 163 की पाबंदी जयपुर में आगामी 22 जून तक पूरी तरह से प्रभावी रहेगी। यदि कोई भी व्यक्ति इस दौरान सोशल मीडिया या धरातल पर लोगों को भड़काने या गैर-कानूनी रूप से भीड़ एकत्र करने का दोषी पाया जाता है, तो पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार कर उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगी।
सोमवार सुबह 6 बजे से जैसे ही जेडीए की पीली मशीनें (बुलडोजर) और डंपर जगतपुरा की नंदपुरी रोड पर पहुंचे, पूरा इलाका एक छावनी के रूप में तब्दील नजर आया। किसी भी संभावित उग्र विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए मौके पर 3000 से अधिक अतिरिक्त पुलिसकर्मियों, महिला पुलिस बल, दंगा नियंत्रण वाहनों (Vajra Vehicles) और राजस्थान एएआरसी (RAC) की विशेष सशस्त्र टुकड़ियों को तैनात किया गया था। खुद पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर हर मिनट की गतिविधि की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे थे।
जिला प्रशासन और जेडीए के अधिकारियों द्वारा स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और धार्मिक कमेटियों के साथ की गई दौर की समझाइश रंग लाई। सड़क सीमा में आ रहे कई मंदिर, मस्जिद, मजार, चबूतरे और सत्संग भवन जैसी धार्मिक संरचनाओं के प्रबंधकों ने कानून का सम्मान करते हुए और शहर के विकास में अपनी भागीदारी निभाते हुए रविवार से ही अपने स्तर पर इन निर्माणों को सुरक्षित रूप से हटाना शुरू कर दिया था। रविवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने खुद आगे आकर अपने अवैध छज्जे, सीढ़ियां और पक्के रैंप तोड़े, जिसके कारण सोमवार को जेडीए को शेष बचे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने में काफी आसानी हुई।
जयपुर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर हुई इस पहली इंटरनेट बंदी ने एक बार फिर राजस्थान में बार-बार होने वाली नेटबंदी के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और इसके सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर बहस को तेज कर दिया। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत देश में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बाद राजस्थान दूसरा ऐसा राज्य रहा है जहां कानून-व्यवस्था और अन्य कारणों से सबसे ज्यादा बार इंटरनेट सेवाओं को अस्थाई रूप से निलंबित किया गया है। अकेले जयपुर शहर की बात करें तो यहाँ अब तक अलग-अलग कारणों से 20 से अधिक बार छोटी-बड़ी (पूर्ण या आंशिक) इंटरनेट बंदी लागू की जा चुकी है।
जयपुर के इस हालिया इतिहास का यदि सूक्ष्म विश्लेषण करें, तो यहाँ मुख्य रूप से दो बड़े कारणों से इंटरनेट को बंद करने की परंपरा रही है:
Updated on:
08 Jun 2026 09:43 pm
Published on:
08 Jun 2026 08:45 am
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