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Bhiwadi Factory Fire: 7 मजदूरों की चिता बना ‘बंद शटर’, गारमेंट फैक्ट्री के नाम पर अंदर ‘बारूद’ का खेल; चीखें तक बाहर न आ सकीं

भिवाड़ी में गारमेंट फैक्ट्री की आड़ में चल रही अवैध पटाखा इकाई में भीषण आग लगने से सात मजदूर जिंदा जल गए। शटर बंद होने से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। धमाकों के बीच चीखें दब गईं।

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Feb 17, 2026
Bhiwadi Factory Fire (Patrika Photo)

Bhiwadi Factory Fire: राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी से 15 किलोमीटर दूर खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह करीब नौ बजकर 10 मिनट पर अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लगने से सात मजदूर जिंदा जल गए। गंभीर रूप से झुलसे चार मजदूरों को दिल्ली रेफर किया गया है।

फैक्ट्री संचालक फरार है और मृतकों में छह लोगों के बिहार के होने की पुष्टि हुई है। अवैध फैक्टरी में 11 श्रमिक पटाखे बना रहे थे, तभी आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पांच किमी क्षेत्र में धमाकों की आवाज सुनाई दी। सुबह 11 बजे आग पर काबू पाया जा सका।

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इनकी हुई दर्दनाक मौत

सुजानत पुत्र शिव पासवान-मोतिहारी, मिंटू पुत्र सिकंदर पासवान-मोतिहारी, अजीत पुत्र सुरेंद्र- मोतिहारी, रवि पुत्र राजदेव-मोतिहारी, श्याम पुत्र जयदेव-चंपारण और अमरेश पुत्र कृष्णलाल-चंपारण है। इनके अलावा मृतक शशिभूषण के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है।

अंदर ही फंसे रहे गए श्रमिक

फैक्ट्री के जिस हॉल में पटाखा निर्माण हो रहा था, उसके अंदर-बाहर प्रवेश के लिए शटर लगा रखे थे। दीवार पर खिड़की थी, जिसमें कांच लगे हुए थे। शटर बंद थे, जिसकी वजह से श्रमिकों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। फैक्ट्री के अंदर घुसने और बाहर निकलने पर रोक थी। आग लगने पर मजदूरों को हॉल से बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।

अब तक की जांच में यह बात सामने आई कि बंद फैक्ट्री में पटाखे बनाए जा रहे थे। यहां 20 से कम लोग काम करते हैं, इस कारण यह फैक्ट्री एक्ट में कवर नहीं हो रही थी। मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो रही है।
-आर्तिका शुक्ला, प्रभारी जिला कलेक्टर, खैरथल-तिजारा

फैक्ट्री मालिक, ठेकेदार और सुपरवाइजर के खिलाफ मामला दर्ज

घटना को लेकर मृतक मिंटू के छोटे भाई राजकिशोर पुत्र सिकंदर पासवान ने खुशखेड़ा थाना में फैक्ट्री मालिक, ठेकेदार और सुपरवाइजर सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस एफआईआर के आधार पर जांच में जुटी है।

राजकिशोर ने बताया कि उसका बड़ा भाई मिंटू इस फैक्टरी में काम करता था। यहां अवैध रूप से बारूद से पटाखे बनवाने का काम मजदूरों को गुमराह कर करवाया जा रहा था, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। मजदूरों के पास कोई सेफ्टी उपकरण भी नहीं थे। मौके पर रखे मेरे भाई व अन्य शव कंकाल में तब्दील हो चुके हैं।

मुझे लगता है कि मेरे भाई मिंटू और उसके साथियों कि हत्या की गई है। राजकिशोर ने कंपनी मालिक राजेंद्र कुमार निवासी गाजियाबाद (यूपी), हेमंत कुमार शर्मा निवासी शाहजापुर जिला कोटपुतली-बहरोड़ राज व कंपनी सुपरवाइजर अभिनंदन निवासी मोतीहारी बिहार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

सुरक्षा इंतजाम भी नहीं

बारूद के ढेर पर मजदूरों से काम कराया जा रहा था, लेकिन आग बुझाने के लिए फायर सिलेंडर, पानी के टैंक या अन्य सुरक्षा संसाधन तक मौजूद नहीं थे।

  • उत्पादन बदलता रहा, रीको ने नहीं दिया ध्यान
  • वर्ष 2005 में गाजियाबाद निवासी राजेंद्र कुमार को आवंटित
  • 2011 में यहां रेडीमेड गार्मेंट का उत्पादन शुरू
  • नवंबर 2016 से जून 2018 तक कोर ऑटो कंपोनेंट का उत्पादन किया गया
  • जुलाई 2018 से जनवरी 2019 तक राजेंद्र कुमार ने यहां फैक्टरी चलाई
  • जनवरी 2019 से अगस्त 2023 तक लोपान मेटल ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हुआ
  • पांच दिसंबर 2023 से वर्तमान तक राजेंद्र कुमार के नाम से ही बिजली का कनेक्शन है।
  • हेमंत यहां अवैध पटाखा फैक्ट्री का संचालन कर रहा था
  • (रीको के नियमानुसार आवंटी को उत्पादन बदलने के बाद उसकी जानकारी देनी होती है। जानकारी नहीं देने पर रीको जुर्माना लगाती है। आवंटन शर्तों का उल्लंघन करने पर भूखंड को भी निरस्त किया जाता है, लेकिन रीको अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया)

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Published on:
17 Feb 2026 08:23 am
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