Khushkhera Firecracker Factory Blast: भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की अवैध पटाखा फैक्टरी में ब्लास्ट की घटना को इतनी जल्दी भुला दिया जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
अलवर। भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की अवैध पटाखा फैक्टरी में ब्लास्ट की घटना को इतनी जल्दी भुला दिया जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। गत 16 फरवरी को हुई घटना में 7 श्रमिकों की मौत उसी दिन हो गई थी। गंभीर रूप से झुलसे 8वें श्रमिक की मौत 22 फरवरी को और 9वें श्रमिक की मौत 26 फरवरी को हुई थी। घटना को आज एक महीना होने जा रहा है।
इस बीच 3 एफआइआर दर्ज कराई गई और अब तक 3 गिरफ्तारियां हुई हैं। इन मौतों के लिए जिम्मेदार रीको, प्रदूषण मंडल, नगर परिषद, श्रम विभाग और फैक्टरी एवं बॉयलर्स विभाग के अफसरों पर अब कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि प्रशासन ने इन्हीं विभागों के अफसरों की संयुक्त टीम बना दी।
इस टीम को प्रशासन ने फैक्टरियों की जांच का जिम्मा सौंपा था, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे फिर से न हों। इस टीम ने 24 फरवरी तक 1058 इकाइयों को विभागीय नियमों का उल्लंघन करने पर कागजी नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा। कितनी इकाइयों ने नोटिस का जवाब दिया, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
24 फरवरी के बाद प्रशासन ने उक्त टीम की जांच एवं कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से तीन तीन लाख रुपए की सहायता राशि दी गई है। कुल मिलाकर मामले में नौ लोगों की मौत के लिए अब तक किसी की जिम्मेदारी तय करके कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में फुटपाथ पर पटाखे बेचो, तो प्रशासन की टीम पूरी दुकान को ही जब्त कर ले जाती है, वहां पटाखों (आतिशबाजी) की अवैध फैक्टरी चल रही थी, लेकिन पुलिस-प्रशासन को पता तक नहीं चला। खुशखेड़ा उद्योग क्षेत्र में जहां यह दर्दनाक घटना हुई, वह इलाका देश की राजधानी दिल्ली से महज 80 किलोमीटर और राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी से महज 15 किलोमीटर दूर है।
अवैध पटाखा फैक्टरी का किरायानामा करने वाले हेमंत शर्मा की शाहजहांपुर से हुई। दूसरी गिरफ्तारी सुपरवाइजर अभिनंदन तिवारी की खुशखेड़ा से 19 फरवरी को हुई। तीसरी गिरफ्तारी हेमंत सचदेवा की 20 फरवरी को दिल्ली से हुई। फिलहाल तीनों जेल में हैं। फैक्टरी अभी तक सीज बताई गई है। हादसे के 28 दिन बाद डीएसटी के हेड कांस्टेबल योगेश कुमार को सस्पेंड किया गया। टपूकड़ा के थानेदार व डीएसटी इंचार्ज मुकेश वर्मा को सीकर पुलिस लाइन भेजा गया। इससे पूर्व डीएसटी को भंग किया गया था।
इस घटना को राजनीतिक दल भी भूल गए हैं। कांग्रेस के नेता सत्तापक्ष को न स्थानीय स्तर पर घेर पाए और न विधानसभा में।
ब्लास्ट से पहले अवैध पटाखा फैक्टरी के बारे में जानकारी छिपाने पर शुरुआती जांच में कुछ लोगों के नाम शामिल किए गए, लेकिन लेकिन न किसी से पूछताछ हुई और न किसी को सजा मिली।
1. एक श्रमिक के भाई राजकिशोर पासवान ने एफआइआर दर्ज कराई थी।
2. खुशखेड़ा थाने के सहायक उप निरीक्षक नरेश कुमार ने एफआइआर दर्ज कराई।
3. जैरोली थाने के पुलिस निरीक्षक महेंद्र ने एफआइआर दर्ज कराई।
1. जिस भूखंड पर अवैध पटाखा फैक्टरी चल रही थी, उस भूखंड को गारमेंट फैक्टरी के लिए आवंटित करने के बाद आंखें बंद करने वाले रीको के अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी।
2. बड़े हादसे को जांच, मुआवजे के दायरे में समेट दिया।
3. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल भिवाड़ी में आतिशबाजी पर पाबंदी के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए थे। प्रदूषण विभाग के अफसरों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
4. घटना के लिए जिम्मेदार का पता करने के बाद तत्काल एक्शन लेना चाहिए था।
नगर परिषद, रीको फर्स्ट और द्वितीय के अलावा श्रम विभाग आदि विभागों ने निरीक्षण कर नोटिस जारी किए हैं। जवाब आने पर कार्रवाई होगी।
-सुमित्रा मिश्र, एडीएम, भिवाड़ी
मृत सात मृतक के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपए दिए हैं। दो गंभीर घायलों को पहले 1-1 लाख रुपए दिए थे, इनकी मृत्यू दिल्ली में हो गई, अब पीएम रिपोर्ट मिलते ही शेष 2-2 लाख रुपए दिए जाएंगे। 3 घायलों को 45-45 हजार रुपए की सहायता दी जा चुकी है।
-शिवपाल जाट, एडीएम, खैरथल तिजारा