एक फरवरी को देश का बजट पेश होने जा रहा है। ऐसे में भिवाड़ी, नीमराणा सहित अलवर जिले के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के उद्योगपति सरकार से उम्मीदें लगाए बैठे हैं।
अलवर. केन्द्र व राज्य सरकार का बजट को लेकर पत्रिका सभी वर्गो की अपेक्षाएं व उनकी राय जानने के लिए उनके बीच जा रहा है। इस कड़ी में पत्रिका टीम ने उद्योगपतियों से चर्चा की तो यह बात सामने आई।
कोरोना की मार से परेशान-
कोरोना की मार से एमएसएमई उद्योग अभी नहीं उभर पाए अभी तक जो राहत पैकेज दिए हैं उन पैकेजों से उद्योग नहीं बढ़ पाए हैं अत: मध्यम, कुटीर, लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को उठाने एवं उन्हें बचाने के लिए केंद्र सरकार अपने बजट में विशेष पैकेज की देने का कार्य करें जिससे पुराने उद्योग को को पुनर्जीवित किया जा सके तथा नए निवेशकों का आगमन हो सके। साथ ही नीमराना में श्रमिकों के लिए 100 बैड का अस्पताल खोला जाए एवं अलवर में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज का शुभारम्भ हो।
-कृष्ण गोपाल कौशिक, महासचिव, नीमराना इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
प्राकृतिक गैस की दरों में काफी वृद्धि हो चुकी है अब उन दरों में कमी की जाए ताकि उद्योगों को उत्पादन लागत कम आए और बाजारों में कम कीमत पर उत्पादन प्राप्त हो। साथ ही विदेशों से आने वाली मशीनों एवं कच्चे माल को बंदरगाहों पर दस्तावेज निरीक्षण एवं जांच केिि लए लंबे समय तक रोक लिया जाता है जिससे उद्योग समय पर स्थापित नहीं हो पाते अत: दस्तावेज सत्यापन एवं जांच सबंधित कार्यवाही शीघ्रता से कि जाएं ताकि कंपनी समय पर अपना उत्पादन कार्य प्रारंभ कर सकें।
-अनिल शर्मा,
निदेशक , ग्रबेको पैकेजिंग एलएलपी, नीमराना
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दें-भारत
2020-21 में कोरोना वायरस महामारी के कारण हुई आर्थिक तबाही से उबरने के लिए कृषि आधारित उद्योग एवं अन्य उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए, विकास और वसूली फिलहाल सबसे बड़ी चिंता जीडीपी में संकुचन है । विकास एवं रिकवरी इस बजट का अहम बिंदु होना है। सरकार को उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बुनियादी ढांचे कौशल विकास और विनिर्माण की दिशा में पैसों का निवेश करना चाहिए, जिससे दोनों अधिक रोजगार सृजन की ओर अग्रसर होंगे, कृषि पर विशेष ध्यान दें सरकार किसान एवं उद्योगों के लिए वेयर हाउस एवं कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं को बेहतर कर सकती है।
-आशीष मालिक, अध्यक्ष,
सोतानाला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
जीएसटी को कम किया जाए-
केंद्रीय बजट में उद्योगों को पैकिंग मैटेरियल, कच्चा माल एवं इंजीनियरिंग पाट्र्स पर अभी जीएसटी ज्यादा है उसको कम किया जाए, जिससे उद्योगों की लागत कम हो एवं वे अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में अपना माल बेच सकें। इस समय उद्योगों को राहत देने का समय है। ऐसे में सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
-आर.के.मालिक
प्रेसीडेंट ऑपरेशन्स नॉर्थ
ग्लोबस स्पिरिट प्रा. लि. गुंती, बहरोड़
करों की दर को कम किया जाए-
केंद्र सरकार की ओर से लिए जा रहे सभी करो की दरों को कम किया जाए जिससे महंगाई कम हो और बाजारों में उत्पादनों की मांग बढ़े जिससे उद्योगों में उत्पादन प्रक्रिया अच्छे स्तर को प्राप्त करें साथ ही निजी करों की स्लैब को कम किया जाए ताकि अधिक से अधिक करदाता इससे जुड़ सकें।
-विशाल बग्गा, निदेशक , जी डी फूड्स प्रा. लि.
जीएसटी स्लैब में शामिल करें-
केंद्र सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कार स्क्रेप स्कीम लागू करें तथा प्राकृतिक गैस जो कि गेल से प्राप्त हो रही है उसको वेट स्कीम से हटाकर जीएसटी स्लैब में शामिल करें, क्योंकि गैस पर वैट बहुत ज्यादा है । कारखानों के माल पर कीमत ज्यादा आ रही है इसे वेट से हटाकर जीएसटी पर लागू करने से लागत कम आएगी एवं कारखाने उत्पादित माल पर कीमत कम लगेगी।
-वरदान अग्रवाल,
निदेशक,
संदेन विकास प्रीसिजन पाट्र्स प्रा. लि.
महामारी को ध्यान में रखते हुए व्यवसाय को चलाना कठिन है, वेतन सब्सिडी के मामले में नियोक्ता को सहायता दी जाए, आयकर में कटौती ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण और प्रशिक्षु की अपेक्षा की जाएगी। उसी पर अनुकूल प्रतिक्रिया की अपेक्षा है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
-अनुज गर्ग, अध्यक्ष, केशवाना इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
औद्योगिक प्रोत्साहन हेतु सरकार उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण एवं रोजगारोन्मुखी सहायता प्रदान करे ताकि बंद उद्योगों को संबल प्राप्त हो। मंहगाई के स्तर को कम करने के लिए ईंधन(पेट्रोल, गैस, डीजल) की दरों को कम किया जाए। और ऐसी व्यवस्था ही की उद्योगों को सुगमता से कम दामों में कच्चे समान कि उपलब्धता हो सके।
के के शर्मा
अध्यक्ष
नीमराना इंडस्ट्रीज एसोसिएशन