राजगढ़. उपखंड के टहला क्षेत्र में मार्बल पत्थर की खानों के बंद होने से राजगढ़ की कई फैक्टरियों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित करीब 80 मिनरल ग्राइडिंग की फैक्टरियां अब बंद होने के कगार पर है। कई फैक्टरियों के बिजली कनेक्शन भी कट गए हैं। टहला क्षेत्र की […]
राजगढ़. उपखंड के टहला क्षेत्र में मार्बल पत्थर की खानों के बंद होने से राजगढ़ की कई फैक्टरियों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित करीब 80 मिनरल ग्राइडिंग की फैक्टरियां अब बंद होने के कगार पर है। कई फैक्टरियों के बिजली कनेक्शन भी कट गए हैं।
टहला क्षेत्र की खोह, गोवर्धनपुरा, मल्लाना, टोडाजयसिंहपुरा आदि खानों से रॉ मैटेरियल सप्लाई होती थी। इन खानों के मार्बल पत्थर की क्वालिटी पूरे भारत में उत्तम मानी जाती है। उक्त खानें विगत 50 वर्षों से चली आ रही थी, लेकिन सरिस्का अभयारण्य के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) के एक किलोमीटर के दायरे में आने वाली 100 से अधिक खानों को मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंद कर दिया। खानों पर अब सन्नाटा पसरा हुआ हैं।मार्बल पाउडर की सप्लाई विदेशों तक
राजगढ़ से मार्बल पाउडर की सप्लाई पूरे भारत के साथ विदेशों में भी की जाती थी। खानों के बंद होने और उत्पादन में गिरावट से न केवल रोजगार प्रभावित हो रहा है, बल्कि निर्यात पर भी असर पड़ा है।................
केवल 40 फैक्टरियां ही चल पा रही
खानों के बंद होने से फैक्टरियों का उत्पादन 80 प्रतिशत घट गया है। वर्तमान में केवल 40 फैक्टरियां ही चल पा रही हैं, जबकि 15-20 के बिजली कनेक्शन कट गए हैं और कुछ ने बिजली का लोड कम करवाया है। इससे मजदूरों की संख्या भी घटकर 2 हजार के लगभग 500 रह गई है।गोपेश कुमार शर्मा, अध्यक्ष इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, राजगढ़।