
अलवर। रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी के दौरान शनिवार रात उस समय हंगामा हो गया, जब रामगढ़ और अकबरपुर थाने की पुलिस एक निर्दलीय प्रत्याशी को अपने साथ ले जाने जयपुर रोड स्थित रिजॉर्ट पहुंच गई। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद कांग्रेस प्रत्याशियों और नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस को प्रत्याशी को साथ लिए बिना लौटना पड़ा।
रामगढ़, बड़ौदामेव, नौगांवा और गोविंदगढ़-रामबास नगरपालिकाओं के कांग्रेस प्रत्याशियों को मतदान के बाद जयपुर रोड स्थित एक रिजॉर्ट में ठहराया गया है। इनके साथ कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भी मौजूद हैं। शनिवार रात पुलिस वार्ड नंबर 10 के निर्दलीय प्रत्याशी योगेश को लेने पहुंची।
पुलिस का कहना था कि योगेश के परिजनों की ओर से थाने में उसके अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसी आधार पर पुलिस उसे अपने साथ ले जाना चाहती थी। हालांकि, मौके पर मौजूद योगेश और उसकी पत्नी ने पुलिस के दावे को खारिज कर दिया। दोनों ने कहा कि योगेश अपनी मर्जी से रिजॉर्ट में ठहरे हैं और उन्हें किसी ने बंधक नहीं बनाया है।
पुलिस जब योगेश को साथ ले जाने लगी तो रिजॉर्ट में मौजूद करीब 150 से 200 कांग्रेस प्रत्याशी और नेता विरोध में खड़े हो गए। देखते ही देखते मौके पर राजनीतिक नारेबाजी और बहस का माहौल बन गया। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा।
हंगामे के बीच पुलिस ने योगेश का बयान दर्ज किया और उसके परिजनों से फोन पर बातचीत भी कराई। इसके बाद पुलिस को मौके से लौटना पड़ा।
कांग्रेस नेता आर्यन जुबेर ने आरोप लगाया कि योगेश अपनी इच्छा से बाड़ाबंदी में शामिल हुए हैं, लेकिन पुलिस ने परिजनों पर दबाव डालकर अपहरण का मामला दर्ज कराया। उन्होंने पुलिस पर जबरन कार्रवाई का प्रयास करने का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि जयपुर के बस्सी के पास भी अलवर नगर निगम के कुछ प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी को लेकर पुलिस के पहुंचने पर विवाद हो चुका है। वहां निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप को पुलिस अपने साथ ले गई थी, जिसके बाद करीब तीन घंटे तक हंगामा हुआ था। कांग्रेस ने दोनों घटनाओं को लेकर भाजपा पर सत्ता के दबाव का आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और आरोपों को लेकर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।