अलवर

बाघों के पुर्नवास का जश्न मना रहा सरिस्का, लेकिन शिकार पर उफ तक नहीं

सरिस्का में बाघों के पुनर्वास के एक दशक पूरा होने का जश्न मनाया गया, लेकिन इन दस सालों में सरिस्का न दो बाघ भी खोए हैं।

2 min read
Jul 04, 2018
बाघों के पुर्नवास का जश्न मना रहा सरिस्का, लेकिन शिकार पर उफ तक नहीं

अलवर. सरिस्का में बाघ पुनर्वास की 10 वीं वर्षगांठ पर जश्न भी मना लिया गया, लेकिन इस दौरान यहां मौत के मुंह में समाए बाघों व गायब हुई बाघिन पर किसी ने उफ तक नहीं की। यही कारण है कि सरिस्का में गत दिनों बाघ एसटी-11 के शिकार एवं बाघिन एसटी-5 के गायब होने की कलई अब तक नहीं खुल पाई है। गत दिनों सरिस्का में बाघ पुनर्वास के 10 साल पूरे होने पर शानदार जश्न मनाया गया। इसमें वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी कई बड़ी हस्तियों के साथ ही पंजाब के गवर्नर भी शामिल हुए। इतना ही नहीं सरिस्का में पूर्व में फील्ड डायरेक्टर व सीसीएफ पदों पर रह चुके अधिकारी भी जश्न में मौजूद रहे।

जश्न के दौरान मेहमानों ने सरिस्का में पर्यटन को बढ़ावा देने पर लंबी चौड़ी तकरीर पेश की, लेकिन सरिस्का के घटते वजूद पर किसी का ध्यान नहीं जा सका। नतीजतन ज्यादातर मेहमानों का ध्यान टूरिज्म को बढ़ाने के लिए सरिस्का के आसपास आलीशान होटल के निर्माण की जरूरत तक ही सिमटा रहा।

ये भी पढ़ें

सरिस्का के जंगलों पर है इनकी बुरी नजर, कई बीघा जमीन पर जमाना चाहते हैं कब्जा

पहले ही शिकारियों का घेरा, अब होटलों की वकालत

सरिस्का पर शुरू से ही शिकारियों का घेरा रहा है, इसी का नतीजा है कि वर्ष 2005 में सरिस्का को टाइगर विहिन होने का दंश झेलना पड़ा। इसके बाद भी शिकारियों की सरिस्का में आसान पहुंच जारी रही। नतीजतन सांभर सहित अन्य वन्यजीवों के शिकार का दौर अभी तक जारी है। जश्न के दौरान बाघों के शिकार पर कोई चर्चा नहीं हो सकी, वहीं ज्यादातर मेहमानों की चिंता सरिस्का क्षेत्र में होटलों के विकास पर केन्द्रित रही। इन मेहमान अतिथियों का मानना है कि सरिस्का में टूरिज्म बढ़ाने को होटल जरूरी है, इस कार्य में किसी को भी अड़चन नहीं डालनी चाहिए।

वहीं सरिस्का के समीपवर्ती होटल में कार्यरत कर्मियों व जिप्सी चालकों के तार शिकारियों से जुड़े होने के प्रमाण पहले भी सरिस्का प्रशासन को मिल चुके हैं। इस पर सरिस्का सीसीएफ डॉ. जीएस भारद्वाज ने आवाज उठाने की कोशिश जरूर की, लेकिन मेहमानों के शोर में यह बात भी दब गई। जबकि वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सरिस्का में पर्यटन विकास के लिए टाइगर का रहना जरूरी है।

सरिस्का में तीन टाइगर हुए कम

सरिस्का में 28 जून 2008 को दुनिया का पहला बाघ पुनर्वास हुआ। इस दिन रणथंभौर से बाघ एसटी-1 को सरिस्का लाकर छोड़ा गया। बाघ पुनर्वास का यह प्रयोग सफल रहा, नतीजतन बाद में सरिस्का व पन्ना सहित अन्य नेशनल पार्कों में बाघ पुनर्वास संभव हो सका। सरिस्का में रणथंभौर से करीब 8 टाइगर का पुनर्वास कराया गया। वहीं करीब 9 टाइगर सरिस्का की देन रही। इसमें बाघ एसटी-1 को सरिस्का में ग्रामीणों ने जहर देकर मार दिया, वहीं पिछले दिनों बाघ एसटी-11 की इंदोक में खेत में लगे फंदे में फंसने से मौत हो गई। उधर, बाघिन एसटी-5 चार महीने से ज्यादा समय से सरिस्का से गायब है। एक दशक में सरिस्का में तीन टाइगर कम होने के बाद भी जश्न के दौरान इन घटनाओं की गहनता से जांच व दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात तो दूर, किसी ने अफसोस तक नहीं जताया।

फैक्ट फाइल

सरिस्का का क्षेत्रफल- 1213.34 वर्ग किलोमीटर
क्रिटिकल टाइगर हैबीटाट- 881.11 वर्ग किलोमीटर
बफर जोन- 332.23 वर्ग किलोमीटर
सरिस्का में बाघ पुनर्वास की शुरुआत- 28 जून 2008

सरिस्का में कुल टाइगर- 12
सरिस्का में बाघ के शावक- 2
एक दशक में बाघों की मौत- 2
इस साल गुम- बाघिन एसटी-5

ये भी पढ़ें

जब बाघ ने चरवाहे पर किया हमला, दहशत में लोग
Published on:
04 Jul 2018 08:58 am
Also Read
View All