अलवर

जंगल बचाने के लिए एनकाउंटर से नहीं हिचकिचाए, लेकिन अब सरकार की वजह से 30 सालों से नहीं मिला प्रमोशन

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Aug 20, 2018
Forest ACF yet not get promotion because of government's negligence
जंगल बचाने के लिए एनकाउंटर से नहीं हिचकिचाए, लेकिन अब सरकार की वजह से 30 सालों से नहीं मिला प्रमोशन

अलवर. सरकार की एक छोटी सी गलती कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा इस बात से सहज लगाया जा सकता है कि नियमों में छूट के प्रावधान के बाद भी सरिस्का में कार्यरत एक एसीएफ को कई सालों से सिर्फ इसलिए प्रमोशन नहीं मिल सका कि वे हिंदी के पेपर की छूट के हकदार थे, जिसे सरकार ने नजर अंदाज कर दिया।

सरिस्का में कार्यरत एसीएफ भरतसिंह को वर्ष 1983 में वन विभाग में रेंजर ग्रेड प्रथम पद पर नियुक्ति मिली। करीब तीस साल तक उनके पूरे बैच को पदोन्नति नहीं दी गई। वहीं उन्हें वर्ष 2015 में उन्हें रेंजर ग्रेड प्रथम से एसीएफ में पदोन्नति दी गई। इसके बाद उन्हें अब तक डीएफओ पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी, जबकि उनके बैच में शामिल अन्य लोगों को न केवल डीएफओ पद पर पदोन्नति मिली, बल्कि सलेक्शन ग्रेड का भी लाभ दे दिया गया।

सिल्वर मेडलिस्ट रहे, शिकारियों का सफाया किया

एसीएफ सिंह प्रशिक्षण के दौरान अपने बैच में सिल्वर मेडलिस्ट भी रहे और सवाई माधोपुर स्थित सवाई मानसिंह अभयारण्य के प्रभारी रहते वनीकरण कराया। वहीं शिकारियों के खिलाफ एनकाउंटर से भी नहीं हिचकिचाए। इसके अलावा सरिस्का में अवैध कब्जे से वन विभाग की भूमि को मुक्त कराया।

इसलिए रखा पदोन्नति से वंचित

राजस्थान नागरिक सेवाएं रुल्स 1959 के सेक्शन 18 (5) में प्रावधान है कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों के पास हिन्दी विषय था, उन्हें पदोन्नति में हिन्दी के पेपर की छूट देय है। इसी नियम के तहत एसीएफ सिंह ने वर्ष 1993 में सभी पेपर क्लियर कर लिए, जिसका 1995 में परिणाम घोषित कर दिया, जिसमें उन्हें हिन्दी के पेपर की छूट नहीं देते हुए पदोन्नति नहीं दी गई। इतना ही नहीं एसीएफ सिंह ने विभाग को अपना बोर्ड प्रमाण पत्र व अंकतालिका भी भिजवाई पर विभाग अब तक अपनी गलती नहीं सुधार पाया। इस कारण उन्हें पदोन्नति से अब तक वंचित रखा गया। नियम अनुसार विभाग को परिणाम के साथ पदोन्नति रोकने क कारण भी बताना होता है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी अब तक नहीं दी गई।

पुराना मामला है दिखवाया जाएगा
एसीएफ की पदोन्नति का यह पुराना मामला है, इसे दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी।
हेमंत सिंह, डीएफओ, सरिस्का बाघ परियोजना

Published on:
20 Aug 2018 11:41 am