अलवर

Alwar: फॉरेस्ट लैंड व माइनिंग लीज के बीच अब नहीं होगा सीमा विवाद, सरकार ने जारी की नई एसओपी

अक्सर वन विभाग और खनन विभाग के बीच सीमा को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। जिसके चलते दोनों ही विभाग पत्राचार करते हैं, लेकिन अब विवाद की स्थिति खत्म हो गई है। राजस्थान सरकार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है।
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Jul 06, 2026
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फाइल फोट

फॉरेस्ट लैंड व माइनिंग लीज के बीच सीमा विवाद अब खत्म हो जाएगा। राजस्थान सरकार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है। सीमा विवाद के चलते प्रदेश की प्रभावित करीब 200 खानों के लिए नया रास्ता खुल गया है। खान विभाग के जिला स्तरीय खनि अभियंता, सहायक अभियंता व ड्राफ्टमैन को जिम्मेदार माना गया है। वे वन विभाग व खान संचालक के बीच समन्वयक का कार्य करेंगे। यदि वन विभाग अपनी जमीन माइनिंग लीज की ओर बताता है, तो खान संचालक की सहमति से लीज का विवादित एरिया कम करके नया मास्टर प्लान तैयार कर दिया जाएगा। इसके लिए किसी अन्य विभाग से एनओसी की जरूरत नहीं होगी और खान का संचालन होता रहेगा।


राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 2017 के नियम 84 ए के अंतर्गत खनन पट्टों में सीमांकन संबंधी विसंगतियों व क्लोजिंग एरर की समस्याओं के निराकरण के लिए यह एसओपी जारी की गई है। खान एवं भू-विज्ञान विभाग उदयपुर के निदेशक एमपी मीणा की ओर से यह आदेश जारी किए गए हैं। वर्ष 2008 में फॉरेस्ट लैंड व माइनिंग लीज के बीच 25 मीटर व वर्ष 2023 में 50 मीटर एरिया छोड़ने के निर्देश दिए गए थे। अब जिस खान को जिस वर्ष में पट्टा मिला, उसे उसी के अनुसार जगह छोड़ते हुए उस एरिया में प्लांटेशन करना है। यदि वन विभाग दावा करता है कि खान संचालक ने ऐसा नहीं किया, तो इस पर माइनिंग अभियंता समन्वयक करके लीज का एरिया घटाकर खान का संचालन करवाएंगे। यदि लीज का एरिया बढ़ाने का दावा संचालक की ओर से किया जाता है, तो उस िस्थति में अलग नियम लागू होंगे।

वर्ष 2015 में सरकार ने जीपीएस अपनाया

खान संचालन के लिए सबसे पहले जरिफ, फीते के जरिए सीमांकन होता था, लेकिन वर्ष 2015 में सरकार ने जीपीएस अपनाया। वर्ष 2022 में डीजीपीएस का प्रयोग होने लगा। यह प्रणाली फिक्स बिंदु का आकलन करके रिपोर्ट देती है, जिस पर सवाल उठाना आसान नहीं। इसके बाद कई खानों के सीमा विवाद शुरू हुए। क्योंकि उनकी खान का पट्टा देते समय सीमांकन जरिफ, फीते या बेयरिंग के जरिए हुआ था और अब आधुनिक प्रणाली से। इसके बाद खान को क्या तो बंद कर दिया गया या फिर जुर्माना आदि लगाया गया। कई मामले न्यायालय पहुंच गए, जिस पर सरकार भी जवाब देते-देते थक गई। इसी को लेकर अब नई एसओपी जारी कर दी गई। लीज का एरिया कम करके खानों का संचालन करवाया जाएगा। नई एसओपी में सहायक प्रोग्रामर, एमई,एएमई, ड्राफ्ट्समैन, कंसेशन क्लर्क, एमएफ, सर्वेयर, एपी आदि को नई जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सर्कल में खान संबंधित कोई विवाद होता है, तो एसएमई कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होंगे।

Updated on:
06 Jul 2026 11:03 am
Published on:
06 Jul 2026 11:03 am