टोल के नाम पर जेब काटने का सिलसिला जारी है। नियमों को ताक में रखकर अलवर से भरतपुर के बीच पांच टोल नाका बनाकर लोगों से अवैध वसूली की जा रही है। कई बार इसे लेकर शिकायतें हुई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। आरटीआई में पूरे मामले का खुलासा हुआ है।
अलवर.
टोल के नाम पर जेब काटने का सिलसिला जारी है। नियमों को ताक में रखकर अलवर से भरतपुर के बीच पांच टोल नाका बनाकर लोगों से अवैध वसूली की जा रही है। कई बार इसे लेकर शिकायतें हुई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। आरटीआई में पूरे मामले का खुलासा हुआ है।
नियम हैं कि नेशनल हाइवे का टोल यूआईटी सीमा से 10 किमी आगे होना चाहिए, लेकिन एनएच 248ए अलवर-दिल्ली रोड पर यूआईटी सीमा के डेढ़ किमी अंदर ही टोल लगाकर पैसा वसूला जा रहा है। विभाग ने जवाब दिया है कि एनएच का टोल यूआईटी सीमा से डेढ़ किमी बाहर होना चाहिए, लेकिन इस नियम का भी पालन नहीं हो रहा है।
अलवर-भरतपुर स्टेट हाइवे पर पर भी मनमर्जी के टोल नाके बना रखे हैं। महज 93 किमी की दूरी पर 4 टोल बनाकर लोगों से वसूली की जा रही है, जबकि नियमानुसार यहां टोल संख्या कम होनी चाहिए। टोल के आसपास किसी तरह की सुविधा नहीं मिल रही है। न यहां एम्बुलेेंस हैं और न ही अन्य सुविधाएं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां नया मार्ग भी नहीं बना है। न ही सुरंग या स्थाई पुल का निर्माण हुआ है।
राजस्थान सरकार का नोटिफिकेशन है, जिसमें साफ दर्शाया गया है कि स्टेट हाइवे के दो टोल के बीच 40 किमी की दूरी होनी चाहिए। लेकिन अलवर-भरतपुर हाइवे पर 90 किमी दूरी में सहजपुर, मोटाका, पान्हौरी और गिरधरपुर में चार जगह टोल वसूली की जा रही है। जो सीधे तौर पर इस नोटिफिकेशन का सीधे तौर पर उल्लंघन है। इसमें मोटाका और सहजपुर के बीच 23.100, पान्हौरी और मोटाका के बीच 21.700 और गिरधरपुर और पान्हौरी के बीच 39 किमी की दूरी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह ठेका फर्म जनता को लूट रही है। उधर, टोल नाकों पर रात को नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। इन नाकों से ओवरलोड वाहनों को निकाला जाता है। इसके एवज में अतिरिक्त राशि वसूलने की शिकायतें भी होती रही हैं। खास बात यह है कि इन टोल नाकों पर वजन नापने के कांटे भी नहीं लगे और न ही निर्धारित दरों में ओवरलोड की अलग से कोई श्रेणी है।