इस साल अलवर जिले के किसानों को गेहूं की फसल से आस है। गेहूं की जिले भर में बुवाई हो रही है जिसका रकबा 1 लाख 77 हजार हैक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है जो कि पिछले साल 1 लाख 45 हजार हैक्टेयर था।
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क/अलवर। इस साल अलवर जिले के किसानों को गेहूं की फसल से आस है। गेहूं की जिले भर में बुवाई हो रही है जिसका रकबा 1 लाख 77 हजार हैक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है जो कि पिछले साल 1 लाख 45 हजार हैक्टेयर था।
अलवर के गेहूं की कई राज्यों में मांग बढ़ी
इस साल मानसून के बाद आई बरसात के कारण गेहूं का रकबा बढ़ने की संभावना है, जिससे अच्छी फसल की भी आस है। इस साल गेहूं के भाव काफी अधिक हैं जो 2500 से 2600 रुपए तक चल रहे हैं। इस बारे में केडल गंज व्यापारिक संचालन समिति के सचिव विजेन्द्र गोयल कहते हैं कि इस साल गेहूं की बुवाई अधिक क्षेत्र में हो रही है। यह फसल अप्रेल में आएगी। अलवर के गेहूं की कई राज्यों में मांग बढ़ी है जिसकी गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
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गेहूं के भाव कम नहीं होने के कारण इसकी बुवाई अधिक क्षेत्र में हुई है। केडल गंज के व्यापारियों ने बताया कि पिछले साल इस समय गेहूं के भाव 2100 रुपए तक थे जो अब 2600 रुपए से अधिक हैं। गेहूं के भाव में अभी और तेजी आएगी जिसके भाव नई फसल आने के बाद ही कम होंगे। अलवर के गेहूं की मांग आटा फेक्ट्रियों में बढ़ी है। इससे पहले 2020 में इसके सर्वाधिक भाव 1800 रुपए प्रति क्विंटल थे।
सरसों के बाद गेहूं
अलवर जिले में सबसे अधिक रकबा पहले गेहूं का रहता था, लेकिन अब सरसों ने यह स्थान ले लिया है। सरसों ऐसी नगदी फसल है जिसके अच्छे भाव मिलने से किसान की साल भर की अर्थव्यवस्था चलती है।