
पुराना सूचना केन्द्र के मैरिज होम का ठेका नगर परिषद अलवर के पूर्व आयुक्त के समय उनके गांव के व्यक्ति को दिए जाने और सरकारी पैसे से मैरिज होम की दशा सुधारने का मामला खासा चर्चा में है। आयुक्त संजय शर्मा का तबादला हो गया। लेकिन यह चर्चा चरम पर है कि अलवर शहर के मैरिज होम का ठेका आयुक्त के गांव के व्यक्ति तक कैसे पहुंचा। ठेका तो कोई भी ले सकता है लेकिन सरकारी पैसे से एक रुपए का काम नहीं करा सकते।
मैरिज होम के ठेके की शर्तों में यह साफ लिखा है कि जैसा हाल है वैसा दिया जाएगा। फिर भी ठेका देने के बाद भी काम चलता रहा। हालांकि मौजूदा ठेकेदार का कहना है कि यह पुराना कार्य हो रहा है। अब शिकायत के बाद निर्माण कार्य बंद करने से और सवाल खड़े हो गए।
अब सफाई में घुसे पार्षद, नए ठेकों का इन्तजार
जिन जनप्रतिनिधियों को आपने वार्ड के विकास के कार्य कराने के लिए पार्षद के रूप में चुना अब वे भी सफाई के ठेकों में घुस गए हैं। अप्रत्यक्ष रूप से ठेकों में पार्टनर हो गए हैं। यही नहीं अब डोर टू डोर कचरा संग्रहण का ठेका भी जल्दी दिया जाएगा। कई पार्षद इसमें भी घुसने की जुगत में लगे हुए हैं।
काम रुकवा दिया
हमने कार्य रुकवा दिया है। मैरिज होम का ठेका हो गया। उसके बाद कोई काम नहीं कराएंगे। सफाई के लिए एक दिन कुछ कर्मचारी पहुंच गए थे। उनको भी बाद में वापस बुला लिया गया।
अशोक खन्ना, नगर परिषद आयुक्त, अलवर
निर्माण का काम पहले से चल रहा
निर्माण का काम पहले से चल रहा है। वह जनवरी माह के कार्यादेश हैं जबकि मैरिज होम का ठेका अब जून में खुली बोली के जरिए दिया गया है। ऐसा नहीं है कि ठेका देने के बाद कोई काम हो रहा है। पहले इस जगह पर गार्ड रूम बनाना तय हुआ था। खुली बोली में कोई भी भाग ले सकता है। चाहे वह मेरे गांव का हो या कोई कहीं का भी।
संजय शर्मा, सभापति, नगरपरिषद अलवर