
जोधपुर की तर्ज पर अलवर में भी इस तरह की पहल की जानी चाहिए। क्योंकि पर्यटक सीजन में लाखों की संख्या में पर्यटक अलवर भ्रमण के लिए आते हैं। अलवर की गलियों व पुराने मौहल्लों में कलात्मक शैली की ऐतिहासिक इमारतें, प्राचीन धरोहर, मंदिर, प्राचीन हवेलियां हैं। जिनको नजदीक से जानने व देखने के लिए पर्यटक आते हैं। अलवर में ना तो पर्यटन विभाग इस बारे में कोई पहल करता दिख रहा है और ना ही नगर निगम को पहल कर रहा है।
अलवर के पर्यटक स्थलों पर भी मिले क्यूआर कोर्ड की सुविधा
जोधपुर में हेरीटेज पाथ पर साइनेज बोर्ड के साथ ही कई प्रमुख् स्थानों पर पत्थरों पर मान्यूमेंट की जानकारी के साथ ही क्यूआर कोड भी लगाया जाएगा जिससे की पर्यटक उसे स्कैन करके वहां की जानकारी ले सकें। जोधपुर की तर्ज पर यह पहल होनी चाहिए।
ये हो सकते हैं प्रस्तावित हैरिटेज मार्ग
1. घंटाघर से होपसर्कस, बजाजा बाजार, त्रिपोलिया से जगन्नाथ मंदिर, सिटी पैलेस से होते हुए बाला किला2 विवेकानंद स्मारक से कंपनी बाग, पुलिस कंट्रोल रूम, विवेकानंद चौक से सिटी पैलेस तक
3. होपसर्कस, पुराना रामलीला मैदान, विवेकानंद सर्किल, लादिया रोड से बाला किला तक4.दिल्ली दरवाजा, लाल दरवाजा, मालाखेड़ा दरवाजा से त्रिपोलिया तक
विकसित हो पार्किंग,पर्यटकों को मिलेगी राहत
इस क्षेत्र में वाहन पार्किंग की समस्या बहुत अधिक रहती हैं। यदि इस क्षेत्र में पार्किंग विकसित हो तो चार चांद लग सकते हैं। पर्यटक सीजन में देशी विदेशी पर्यटक इन संकरी गलियों में यहां का हेरीटेज देखने के लिए आते हैं लेकिन पार्किंग की सुविधा ना होने से परेशान रहते हैं। पैदल ही सैर करते हैं।