Rajasthan News: आईपीएल शुरू होते ही अलवर जिले में सट्टे का अवैध कारोबार भी तेज हो गया है। ओपनिंग मैच में ही करीब 20 करोड़ रुपए का सट्टा लगाए जाने का अनुमान है, जिसमें ऑनलाइन ऐप्स और बुकियों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है।
Alwar IPL Satta: इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) का रोमांच जिले में सट्टे के काले कारोबार में बदलता नजर आ रहा है। ओपनिंग मैच में ही अलवर जिले में 20 करोड़ रुपए से अधिक का सट्टा लगाए जाने का अनुमान है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार की जड़ें अब ऑफलाइन से निकलकर ऑनलाइन ऐप्स के जरिए दुबई से जुड़ चुकी हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर गली-मोहल्लों तक बुकियों का जाल फैला हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, आइपीएल के पहले मैच (आरसीबी बनाम हैदराबाद) में ऑफलाइन के बजाय ऑनलाइन ऐप्स के जरिए बड़े पैमाने पर सट्टा खेला गया। एक बुकी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मैच शुरू होने से पहले ही टीमों के भाव तय कर दिए जाते हैं और हर गेंद के साथ ये बदलते रहते हैं।
सट्टा बाजार में पहले मैच के दौरान बेंगलुरु टीम का भाव 90-92 के बीच खुला। बड़े बुकी अन्य नेटवर्क से मिली टिप के आधार पर भाव तय करते हैं। मैच के दौरान हर गेंद, हर रन और हर विकेट पर दांव बदलता रहता है। नतीजा कुछ भी हो, अंत में फायदा बुकियों का ही होता है।
अलवर में डेढ़ दर्जन से अधिक बड़े बुकी सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनके गुर्गे शहरभर में फैले हुए हैं, जो पैसों का लेन-देन संभालते हैं। हैरानी की बात यह है कि आम लोगों को इन बुकियों की जानकारी है, लेकिन पुलिस की ओर से हाल के समय में कोई बड़ा अभियान या कार्रवाई सामने नहीं आई है। आंकड़ों के अनुसार आइपीएल के हर मैच पर अकेले अलवर में करीब 20 करोड़ रुपए का सट्टा लगाया जा रहा है। इस खेल की लत में फंसे युवा अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं।
शहर के अखैपुरा पुलिस चौकी के आसपास, मीना पाड़ी, लखंडा वाला कुआं, शालीमार, छाजूराम की गली, दाऊदपुर, काला कुआं, विवेकानंद नगर, 60 फीट रोड, हिंदू पाड़ा, एनईबी, मन्नी का बड़, बैंक कॉलोनी, मोती डूंगरी और बुधविहार सहित कई क्षेत्रों में सटोरियों की सक्रियता बताई जा रही है। कई बड़े बुकी आइपीएल शुरू होते ही अन्य जिलों में ठिकाने बनाकर ऑनलाइन नेटवर्क चला रहे हैं।
सट्टे के इस नेटवर्क में बड़े बुकी ग्राहकों को एडवांस लेकर उनकी ऑनलाइन आइडी बनाते हैं। फिर यूजरनेम और पासवर्ड देकर पॉइंट्स के जरिए सट्टा खिलाया जाता है। ग्राहक जितनी राशि जमा करता है, उतने पॉइंट्स उसकी आइडी में डाल दिए जाते हैं। साप्ताहिक हिसाब-किताब आमतौर पर सोमवार को किया जाता है। वहीं, कम पढ़े-लिखे या तकनीक से दूर लोग अब भी ऑफलाइन तरीके से फोन पर ही सट्टा लगाते हैं।
क्रिकेट के सट्टे में सिर्फ मैच के नतीजे पर ही नहीं, बल्कि हर छोटी-बड़ी घटना पर दांव लगाया जाता है। एक ओवर में कितने रन बनेंगे, कितने चौके-छक्के लगेंगे, किस गेंदबाज को विकेट मिलेगा या रन आउट होगा, हर पहलू सट्टे का हिस्सा होता है। इसके लिए सटोरिए सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए लगातार संपर्क में रहते हैं।जिले में तेजी से फैलते इस अवैध कारोबार ने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। युवाओं का इसमें बढ़ता झुकाव और खुलेआम चल रहे नेटवर्क के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव चिंताजनक है।