Gafruddin Mewati: इसे संयोग ही कहेंगे कि जिस समय केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार में नाम की घोषणा की, उस समय भपंग के साथ गफरुद्दीन मेवाती अलवर के सूचना केंद्र में प्रस्तुति दे रहे थे। सूचना केंद्र में वंदेमातरम 150 स्मरणाेत्सव की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में मेवाती ने केंद्रीय वनमंत्री के समक्ष अपनी आकर्षक प्रस्तुति दी।
गफरुद्दीन मेवाती जोगी डीग जिले के मेवात अंचल के कामां विधानसभा क्षेत्र के गांव कैथवाड़ा के रहने वाले हैं। अभी वे अलवर आकर बस चुके हैं और मूंगस्का की टाइगर कॉलोनी में निवास कर रे हैं।
हिन्दुस्तान भर में उनके हुनर के दीवाने हैं तो सात समंदर पार भी उनकी कला के कद्रदान बहुतेरे हैं। विरासत में मिली इस कला को वह पीढ़ी दर पीढ़ी देना चाहते हैं, जिससे हमारे देश और जिले की कला को यूं ही मान-सम्मान मिलता रहे।
गफरुद्दीन मुख्य रूप से महादेवजी का ब्यावला, पांडुओं का कड़ा (महाभारत), ब्रज के लोक गीत एवं श्रीकृष्ण के भजन गाते हैं। अब फाल्गुनी बयार में वह होली के गीत भी सुना रहे हैं।
गफरुद्दीन पिछले कुछ सालों से बेटे शाहरुख के अलावा पोते दानिश जोगी वंदिल जोगी को भी इस कला की बारीकियां सिखा रहे हैं। गफरुद्दीन ने बताया कि उनके पिता बुद्ध सिंह इस कला में माहिर थे।
उनकी इस कला का सम्मान विदेशों तक हुआ। पिता से ही उन्होंने इस कला में महारथ हासिल की। गफरुद्दीन इस कला का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया, कनाड़ा, पेरिस, लंदन एवं अमेरिका में कर चुके हैं।
गफरुद्दीन ने बताया कि पहले स्थानीय स्तर पर इस कला के कद्रदान बहुत थे। पहले ब्याह-शादियों में मनोरंजन के तौर पर इस कला का प्रदर्शन किया जाता था।
जब किसी परिवार में लड़के-लड़की की शादी तय हो जाती थी तो लोग हमारे पास आते थे। यदि हमारी उस तिथि को कहीं बुकिंग होती थी तो लोग अपने विवाह की तिथियां बदल देते थे, लेकिन आज युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर रमी नजर आती है।
गफरुद्दीन अपनी कला की बदौलत प्रधानमंत्री से सम्मान पा चुके हैं। गफरुद्दीन ने बताया कि महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर हुए कार्यक्रम में पीएमओ कार्यालय की ओर से उन्हें बुलाया गया था और उनका सम्मान किया गया था।
इस दौरान फिल्मी सितारों के रूप में कंगना रनौत, शाहरुख खान एवं आमिर खान आदि मौजूद रहे थे। गफरुद्दीन राज्य सरकार से भी सम्मान पा चुके हैं।