
राजस्थान के नए गठित जिले खैरथल-तिजारा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए जिला स्पेशल टीम (DST) में तैनात दो कांस्टेबलों को 2 लाख रुपये की मोटी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए पुलिसकर्मियों की पहचान कांस्टेबल बृजेश और कांस्टेबल ईश्वर सिंह के रूप में हुई है, जो लंबे समय से जिले की डीएसटी टीम में कार्यरत थे। आरोप है कि दोनों कांस्टेबल क्षेत्र के मावा व्यापारियों को डरा-धमकाकर उनसे भारी रकम वसूल रहे थे और उनकी फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर सीज करने की धमकी दे रहे थे।
मावा व्यापारी द्वारा दी गई शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने पूरे मामले का सत्यापन कराया और योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को रिश्वत की रकम के साथ दबोच लिया। एसीबी के महानिदेशक (DG) गोविंद गुप्ता और अपर महानिदेशक (ADG) स्मिता श्रीवास्तव के कड़े निर्देशों पर तथा एसीबी एसपी पीयूष दीक्षित के सुपरविजन में इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खैरथल-तिजारा जिले में त्योहारों और आम दिनों में मावा कारोबार से जुड़े व्यापारियों को निशाना बनाया जा रहा था। डीएसटी में तैनात कांस्टेबल बृजेश और ईश्वर सिंह ने एक स्थानीय मावा व्यापारी को लगातार परेशान करना शुरू कर दिया था।
कांस्टेबलों द्वारा व्यापारी पर दबाव बनाया जा रहा था कि यदि वह बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के अपनी मावा फैक्ट्री चलाना चाहता है और रेड की कार्रवाई से बचना चाहता है, तो उसे 2 लाख रुपये की बंदोबस्त राशि यानी रिश्वत देनी होगी। ऐसा न करने पर दोनों पुलिसकर्मियों ने उसकी मावा फैक्ट्री पर अचानक पुलिस रेड मार कर उसे तुरंत सीज करवाने की सीधी धमकी दी थी।
लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर मावा व्यापारी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की शरण ली और अपनी आपबीती अधिकारियों को बताई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी डीएसपी शब्बीर खान के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया।
एसीबी टीम ने गोपनीय तरीके से रिश्वत की मांग का सत्यापन (Verification) करवाया, जिसमें कांस्टेबलों द्वारा 2 लाख रुपये मांगे जाने की पुष्टि हो गई। सत्यापन सफल होने के बाद एसपी पीयूष दीक्षित के सुपरविजन में ट्रैप की रणनीति तैयार की गई और व्यापारी को केमिकल लगे नोटों के साथ आरोपियों के पास भेजा गया।
तय रणनीति के अनुसार, जैसे ही परिवादी मावा व्यापारी ने कांस्टेबल बृजेश और ईश्वर सिंह को 2 लाख रुपये की रिश्वत राशि सौंपी, आसपास सादा कपड़ों में मुस्तैद खड़ी एसीबी डीएसपी शब्बीर खान की टीम ने तुरंत मौके पर दबिश दे दी।
एसीबी की टीम ने दोनों कांस्टेबलों को मौके से ही रिश्वत के 2 लाख रुपये के साथ रंगे हाथ दबोच लिया। इसके बाद दोनों आरोपियों के हाथ पानी से धुुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया, जिससे घूस लेने का पुख्ता प्रमाण मिल गया। एसीबी की टीम तुरंत दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कागजी कार्रवाई और पूछताछ में जुट गई।
पुलिस महकमे के भीतर ही जारी इस तरह की अवैध वसूली और व्यापारियों को डराने-धमकाने के मामले से खाकी वर्दी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि दोनों गिरफ्तार कांस्टेबलों के आवासीय ठिकानों और अन्य संपत्तियों की भी गहनता से तलाश ली जा रही है।
एसीबी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस अवैध वसूली के खेल में डीएसटी या स्थानीय थाने के कुछ अन्य अधिकारी भी शामिल थे या नहीं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले भर के व्यवसायियों में राहत का माहौल है, जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों और अधिकारियों में डर देखा जा रहा है।