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किशनगढ़बास में 19 फीट का बथुआ, छह साल की मेहनत से तैयार अनोखा पौधा

राजस्थान में खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़बास में बथुए के एक पौधे ने सबका ध्यान खींचा है। तीतरका के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में लगा यह पौधा करीब 19 फीट ऊंचा हो गया है। इसे तैयार करने के पीछे कृषि छात्र साहिल सीमतवाल की छह साल से ज्यादा की मेहनत और लगातार प्रयोग शामिल हैं।
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Oct 04, 2026
kishangarhbas 19 feet bathua
19 फीट ऊंचा बथुआ का पौधा और उसके आगे खड़े हैं छात्र साहिल (फोटो - पत्रिका)

सर्दियों में घरों में हरी सब्जी के तौर पर इस्तेमाल होने वाला बथुआ (Bathua) अब अपनी असाधारण ऊंचाई के कारण चर्चा में है। राजस्थान में खैरथल-तिजारा जिले के तीतरका स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में बथुए का पौधा करीब 19 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया है। आमतौर पर बथुए को जमीन के पास उगने वाली हरी सब्जी के रूप में देखा जाता है, ऐसे में इतने ऊंचे पौधे को देखकर लोग भी हैरान हैं।

बथुए की देसी वैरायटी पर प्रयोग 

इस अनोखे पौधे को तैयार करने के पीछे कृषि छात्र (Agriculture Student) साहिल सीमतवाल की छह साल से अधिक समय की मेहनत है। साहिल लॉर्ड्स यूनिवर्सिटी में बीएससी एग्रीकल्चर तृतीय वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने पिछले छह से सात वर्षों से बथुए की देसी वैरायटी पर लगातार प्रयोग और शोध किया है। इसी दौरान उन्होंने पौधों के चयन और बीजों को दोबारा उगाने की प्रक्रिया को जारी रखा।

साहिल ने शुद्ध वंशक्रम चयन (Pure Line Selection) पद्धति के जरिए बथुए की देसी किस्म पर काम किया। इसके तहत हर साल एक जैसी किस्म के बथुए को उगाया गया। फसल तैयार होने के बाद उनमें से सबसे स्वस्थ, मजबूत और बेहतर पौधों का चयन किया गया। इन चुने हुए पौधों से प्राप्त बीजों को अगले सीजन में फिर बोया गया।

कई वर्षों तक की मेहनत 

यह प्रक्रिया एक-दो साल तक नहीं, बल्कि लगातार कई वर्षों तक चली। हर सीजन में कमजोर पौधों को अलग किया गया और बेहतर पौधों से प्राप्त बीजों को आगे इस्तेमाल किया गया। इस तरह लगातार पौध चयन (Plant Selection) और प्रयोग के जरिए बथुए की इस देसी वैरायटी में वांछित गुणों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

साहिल की वर्षों की मेहनत का नतीजा इस बार देखने को मिला। इस सीजन में तैयार बथुए का पौधा करीब छह महीने में लगभग 19 फीट ऊंचाई तक पहुंच गया। विद्यालय परिसर में खड़ा यह पौधा अब स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। इसे देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंच रहे हैं।

19 फीट पहुंची हाइट 

साहिल का यह प्रयोग कृषि अनुसंधान (Agriculture Research) और देसी किस्मों के संरक्षण की दिशा में भी खास माना जा सकता है। बथुए जैसी सामान्य सब्जी की देसी वैरायटी पर लंबे समय तक लगातार चयन और प्रयोग से किस तरह अलग परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, यह पौधा उसका उदाहरण है।

किशनगढ़बास में 19 फीट ऊंचा बथुआ का पौधा

छह साल से ज्यादा समय तक किए गए प्रयोग के बाद सामने आए इस 19 फीट ऊंचे बथुए ने यह भी दिखाया है कि कृषि क्षेत्र में छोटे स्तर पर किए गए लगातार प्रयोग भी अलग और रोचक परिणाम दे सकते हैं। फिलहाल यह पौधा तीतरका के विद्यालय परिसर में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Updated on:
04 Oct 2026 12:54 pm
Published on:
04 Oct 2026 12:54 pm