
अलवर। लंबी जद्दोजहद के बाद कांग्रेस ने लोकसभा प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में अलवर लोकसभा सीट से मुंडावर विधायक ललित यादव को प्रत्याशी बनाया गया है। अब भाजपा के भूपेंद्र यादव के सामने कांग्रेस के ललित यादव के खड़े होने से मुकाबला वरिष्ठ बनाम युवा हो गया है। हालांकि दोनों ही प्रत्याशियों का यह पहला लोकसभा चुनाव है।
अनुभव की बात की जाए तो भूपेंद्र यादव कहीं न कहीं ललित यादव पर भारी पड़ते हैं। भूपेंद्र यादव अभी केंद्र सरकार में वनमंत्री हैं और राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। उनके नेतृत्व में भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में परचम फहराया है, ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ने और लड़ाने का अनुभव है। उधर, ललित यादव की बात की जाए तो उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे युवा हैं। साथ ही, अलवर के स्थानीय निवासी होने के साथ ही मुंडावर से विधायक हैं। इससे पहले भी उन्होंने 2018 में बसपा से विधानसभा का चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे।
अन्य जातियां तय करेगी हार-जीत
अलवर में यादव वोटों की संख्या अच्छी खासी है। लेकिन दोनोंं ही पार्टियों से यादव प्रत्याशियों के मैदान में आने से अब अन्य पार्टियां जीत-हार तय करेंगी। ब्राह्मणों के साथ यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या बहुत है। दलित वोट भी हैं। ऐसे में यह देखने लायक होगा कि दोनों पार्टियां किस तरह वोटरों को लुभाती हैं।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का पलड़ा भारी
विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। अलवर लोकसभा में 8 विधानसभा सीट आती है। इसमें पांच पर कांग्रेस और तीन पर भाजपा का कब्जा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अंतर होता है। मुद्दे भी अलग होते हैं। लेकिन यह जरूर है कि मुकाबला कड़ा होने वाला है।