अलवर

Alwar: मत्स्य विवि: 3 साल में 34 हजार से ज्यादा घटे छात्र, डिग्री पूरी करने में लग रहे 4 साल

अलवर के राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय (Matsya University) से जुड़े कॉलेजों में विद्यार्थियों के नामांकन (Student Enrollment) में बड़ी गिरावट आई है। 2023 में 1 लाख 38 हजार 597 नामांकन के मुकाबले 2026 में यह संख्या घटकर 1 लाख 4 हजार 578 रह गई। यानी तीन साल में 34 हजार 19 नामांकन कम हुए।
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Oct 02, 2026
matsya university
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अलवर के राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2023 के मुकाबले वर्ष 2026 में विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों के नामांकन में 34 हजार 19 की कमी आई है। वर्ष 2023 में 1 लाख 38 हजार 597 नामांकन थे, जो 2026 में घटकर 1 लाख 4 हजार 578 रह गए। तीन साल में करीब 24.5 प्रतिशत नामांकन कम हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 में 1 लाख 33 हजार 592 नामांकन थे।

विश्वविद्यालय से करीब 202 कॉलेज संबद्ध

2023 में यह बढ़कर 1 लाख 38 हजार 597 के उच्च स्तर पर पहुंचे। इसके बाद गिरावट शुरू हुई। वर्ष 2024 में नामांकन 1 लाख 36 हजार 999 और 2025 में अचानक घटकर 1 लाख 2 हजार 243 रह गए। वर्ष 2026 में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद संख्या 1.05 लाख के आसपास रही। वर्ष 2024 के मुकाबले भी 2026 में 32 हजार 421 नामांकन कम हैं। इन आंकड़ों में सभी सरकारी और निजी कॉलेज शामिल हैं। विश्वविद्यालय से करीब 202 कॉलेज संबद्ध हैं।

नामांकन में गिरावट के बीच विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था भी सवालों में है। तीन साल में पूरी होने वाली स्नातक डिग्री कई विद्यार्थियों को साढ़े तीन से चार साल में पूरी करनी पड़ रही है। परीक्षा और प्रायोगिक परीक्षाएं समय पर नहीं होने से परिणाम जारी होने में देरी होती है और अगली कक्षा का प्रवेश भी प्रभावित होता है। वर्ष 2026 में निकाय चुनाव के कारण कुछ परीक्षाओं की तिथियां बदली गईं। यूजी द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर की प्रायोगिक परीक्षाओं की तारीखें भी बढ़ाई गईं। अभी कुछ कॉलेजों में प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं।

शहर से दूर कैंपस, आवागमन बड़ी समस्या

हल्दीना स्थित विश्वविद्यालय परिसर अलवर शहर से काफी दूर है। पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन नहीं होने से विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी होती है। विश्वविद्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों को चुनाव सहित अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाए जाने से भी नियमित कामकाज पर अतिरिक्त दबाव रहता है। वहीं, विश्वविद्यालय में नियमित शैक्षणिक स्टाफ के साथ जरूरी संसाधनों की कमी भी सामने आती रही है।

पीएचडी शुरू नहीं, शोध गतिविधियां भी सीमित

विश्वविद्यालय में पीएचडी अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इससे उच्च शिक्षा और शोध के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय में आगे बढ़ने के अवसर सीमित हैं।

इनका कहना है

नामांकन कम हुआ है तो इसे दिखवाया जाएगा। विश्वविद्यालय में नामांकन बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे - हेमराज परिडवाल, रजिस्ट्रार, मत्स्य विवि

Updated on:
02 Oct 2026 01:05 pm
Published on:
02 Oct 2026 01:05 pm