
अलवर. नगर परिषद आयुक्त व पार्षदों के विवाद से आगे नया झमेला खड़ा हो सकता है। जयपुर में होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में अलवर के लाभार्थियों को ले जाने की आधी अधूरी तैयारी है जिसकी तस्वीर सरकार के शीर्ष तक पहुंची तो मामला भारी हो सकता है। ऐसा इसलिए कि कार्यक्रम से एक दिन पहले ही नगर परिषद में सहायक जिला कलक्टर ने आकर कर्मचारी व अधिकारियों को प्रत्येक वार्ड से लाभार्थियों को ले जाने की जिम्मेदारी दी है।
प्रति दो वार्ड पर एक कर्मचारी व दस वार्डों पर एक अधिकारी लगाया है। पहले से तैयारी इसलिए नहीं हो सकी कि नगर परिषद में आयुक्त व पार्षदों की लड़ाई चरम पर पहुंच गई जिसके कारण आयुक्त भी बीच में अवकाश पर चले गए। इसी बीच नगर परिषद ने बोर्ड की आपात बैठक बुलाकर आयुक्त के खिलाफ निन्दा प्रस्ताव पारित कर दिया। पांच कर्मचारियों के निलम्बन का प्रस्ताव हो गया। इन हालातों में किसी ने ध्यान नहीं दिया।
एसीईएम ने दिए निर्देश
सहायक जिला कलक्टर जावेद अली ने बुधवार को नगर परिषद के सभागार में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जरूरी निर्देश दिए। अलग-अलग टीमें बनाई। प्रत्येक दो वार्ड से एक बस अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थियों को ले जाने का लक्ष्य थमाया। हालांकि इससे पहले ज्यादा कुछ तैयारी नहीं होने से अब अधिकारी व कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं।
साथ में सफाई कर्मचारी भर्ती लॉटरी निरस्त
इसके अलावा पूरे प्रदेश में अलवर की सफाई कर्मचारी भर्ती की लॉटरी निरस्त करनी पड़ी है। भर्ती की विज्ञप्ति में स्पष्ट जानकारी होने के बावजूद पुरानी भर्ती 2012 के पात्र आवेदकों को शामिल नहीं किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद सरकार को अलवर की भर्ती निरस्त कर दोबारा से लॉटरी निकालने के आदेश जारी करने पड़े। इस मामले में भी अलवर की तोहीन हुई है। अब आगे प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में अलवर से लाभार्थी कम गए और शीर्ष नेतृत्व के पास यहां की लड़ाई पहुंची तो कईयों पर गाज गिर सकती है।