अलवर. शिव कॉलोनी तिजारा फाटक निवासी मुनेश कुमार बचपन से ही स्पोर्ट्स में रुचि थी और आर्मी में जाना सपना था। लेकिन 10 साल की उम्र में ही एक पैर एक्सीडेंट में गवाने के कारण सब सपने टूट गए। लेकिन पिता हवा सिंह व परिजनों ने सहयोग किया। इसके बाद पैरा खेलों में खेलना शुरू […]
अलवर. शिव कॉलोनी तिजारा फाटक निवासी मुनेश कुमार बचपन से ही स्पोर्ट्स में रुचि थी और आर्मी में जाना सपना था। लेकिन 10 साल की उम्र में ही एक पैर एक्सीडेंट में गवाने के कारण सब सपने टूट गए। लेकिन पिता हवा सिंह व परिजनों ने सहयोग किया। इसके बाद पैरा खेलों में खेलना शुरू कर दिया। वह बताते हैं कि 2022 में पहली बार मुझे पैरा स्पोर्ट्स के बारे में पता चला। लेकिन खेल के उपकरण महंगे होने के कारण खेल नहीं पाया। लेकिन स्टेडियम में कोच विनोद सैनी ने मुझे हर तरह से सहयोग किया। फिर 2024 में मैंने आर्चरी में जाकर प्रशिक्षण लेना शुरू किया। 6वीं पैरा आर्चरी नेशनल चैंपियनशिप जनवरी 2025 में ऑल इंडिया 10 वीं पोजीशन हासिल हुई और खेलो इंडिया पैरा गेम्स मार्च 2025 में ऑल इंडिया 4वीं रैंक हासिल की। आज मुनेश उन दिव्यांगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो हादसे के बाद शरीर का कोई अंग खो देते हैं और जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करते हैं। वह बताते हैं कि जिंदगी सभी को एक मौका देती हैं कुछ करने का, समय रहते उस मौके का फायदा उठाना चाहिए, हौंसला कभी नहीं तोड़ना चाहिए।