
अलवर. जिले में संगीन अपराध तेजी से बढ़ रहा है। अपराधी बड़ी शातिरी से संगीन अपराध कारित कर रहे हैं। कई मामलों में पुलिस मैराथन पड़ताल के बाद भी अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी। पिछले कुछ सालों में शहर सहित जिले में कई ऐसी संगीन हत्या की वारदातें हुईं, जो आज भी पुलिस के लिए अनसुलझी गुत्थी बनी हुई है। इन प्रकरणों में शुरुआत में तो पुलिस जी-जान से तफ्तीश में जुटी, लेकिन जैसे-जैसे समय निकलता गया ये मामले पुलिस की प्राथमिकता से दूर होते चले गए। ये हत्याएं भले ही पुलिस के जहन से उतर गई हो, लेकिन पीडि़त परिवारों के दिलों-दिमाग से आज तक नहीं उतर पाई है। उनके मन में आज भी अपराधियों के सलाखों के पीछे नहीं पहुंचने का मलाल है। पुलिस की कार्रवाई पर भी उनका भरोसा टूट चुका है।
डिस्पोजल व्यापारी के हत्यारे आज भी खुले में
शहर के बीचों-बीच बस स्टैण्ड रोड पर मई 2016 में दिनदहाड़े दुकान के अंदर घुसकर एक डिस्पोजल व्यापारी की गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस मामले से पूरे शहर में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले में कई दिन तक घटनास्थल और सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा। व्यापारियों ने भी वारदात के खुलासे के लिए प्रदर्शन किए। ये वारदात अलवर पुलिस के लिए आज भी अनसुलझी गुत्थी बनी हुई है।
पिता-पुत्र को सरेराह गोली मारी
जून-2014 में अलवर-मालाखेड़ा मार्ग पर टोल नाके के समीप पिता-पुत्र को गोली मारकर बाइक सवार बदमाश करीब साढ़े छह लाख रुपए लूट ले गए थे। मृतक पिता-पुत्र अलवर तहसील से जमीन के बेचान की रजिस्ट्री कराकर राशि लेकर बाइक से अपने गांव लीली लौट रहे थे। इस डबल मर्डर मामले का पुलिस चार साल बाद भी खुलासा नहीं कर सकी है।
मेडिकल सेल्समैन का भी रेता था गला
बिजलीघर चौराहा के पास स्थित एक मेडिकल होलसेल भंडार के सेल्समैन की भी जून-2014 में भिवाड़ी बस स्टैण्ड के समीप दिनदहाड़े गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। सेल्समैन दवा का कलेक्शन करके लौट रहा था। इस मामले में मेडिकल व्यवसायियों ने अलवर में धरना-प्रदर्शन कर पुलिस पर खूब दबाव बनाया, लेकिन फिर भी पुलिस मामले में खुलासा नहीं कर सकी।