
अलवर. शहर के चौराहो से लेकर रेलवे स्टेशन तक सभी जगह पर जिला प्रशासन की ओर से कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन जिले के सबसे बड़े सामान्य चिकित्सालय में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को लेकर अस्पताल प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है। यहां पर आज तक कैमरे नहीं लगाए गए हैं। यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज व उनके परिजन आते हैं, पुलिस भी यहां पर अपराधियों का मेडिकल कराने के लिए, उनको भर्ती कराने के लिए लेकर आते है जिसके चलते यह जगह अपराध की दृष्टि से भी संवेदनशील है। यहां पर इलाज कर रहे डाक्टरों व मरीजों के साथ कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है।
पुलिस के लिए मददगार होते हैं कैमरे
शहर में हो रहे अपराधों को कलई खोलने में कई बार पुलिस के लिए ये कैमरे मददगार भी साबित होते हैं। सामान्य चिकित्सालय के वार्डों मेें चोरियां होना, जेब कटना, मरीजों व डाक्टर से मारपीट करना आम बात है। यदि यहां कैमरे लगे होते हैं तो चोरों को पकडऩा आसान हो जाता है।
विश्राम गृह में मरीजों के परिजन कुछ समय के लिए आराम करते हैं। यहां पर टीवी लगाया हुआ है। जो दिखावटी है। यह टीवी पिछले काफी समय से खराब पड़ा हुआ है। ऐसे में यहां पर बैठे लोगों का समय काटना मुश्किल हो जाता है। टीवी होने से बड़ों के साथ बच्चों का भी मनोरंजन होता था। लेकिन अब दोनों ही परेशान है। विश्राम गृह के अंदर भी कैमरे नहीं हैं। यहां शाम होते ही शराबी आ जाते हैं, दिन में भी उनका यह कब्जा रहता है। शराबियों की वजह से यहां परिजनों में भय बना रहता है। सुरक्षा गार्डो ने बताया कि जो भी लोग संदिग्ध नजर आते हैँ उनको बाहर किया जाता है। लेकिन इसके बाद भी आवारा किस्म के लोग इधर उधर से अंदर आ जाते हें।
सुरक्षा गार्ड के भरोसे चल रही है सुरक्षा
अस्पताल में आने वाले लोगों की सुरक्षा केवल गार्डो के हवाले ही है। यहां पर प्रवेश के लिए मुख्यद्वार के अलावा और भी कई रास्ते हैं। कंपनी बाग रोड, जनाना अस्पताल के सामने, व समान्य अस्पताल के पीछे की ओर से भी इसमें प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में अपराधी किस रास्ते से अंदर आ जाए कहा नहीं जा सकता । इसलिए कैमरे का होना आवश्यक है।