
इस बार अलवर और भरतपुर की सात कृषि उपज मंडियों के आढ़ती समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद करेंगे। यह खरीद अलवर, भरतपुर, खेरली, कामां, वैर, बड़ौदामेव और लक्ष्मणगढ़ की मंडियों में होगी। इन जगहों पर बने सरकारी केंद्रों को खत्म कर दिया गया है।
अब किसान इन मंडियों में सीधे समर्थन मूल्य पर आढ़तियों को गेहूं बेच सकेंगे। गेहूं की यह खरीदी सरकार की ओर से तय भाव 2575 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से होगी। सरकारी खरीद के लिए सरकार और मंडी व्यापारियों के मध्य अभी एग्रीमेंट होना बाकी है। मालाखेड़ा, रामगढ़, गोविन्दगढ़, रैणी, राजगढ़ और कठूमर में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद होगी। मंडी में नए गेहूं की आवक 10 से 15 दिनों के बाद शुरू हो जाएगी।
हर साल सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं होता। ज्यादातर किसान मंडी व्यापारियों को ही गेहूं बेचते हैं। ऐसे में सरकारी खरीद केन्द्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है।
इस सीजन में मंडी व्यापारियों को सरकार को कम से कम 6 लाख गेहूं के कट्टे खरीद कर देने होंगे। अधिकतम की कोई सीमा तय नहीं है। सरकार के साथ एग्रीमेंट में व्यापारियों को कितने प्रतिशत तक लाभ किया जाएगा और क्या हिसाब रहेगा, यह अभी तय नहीं है।
मंडी में केवल वे ही व्यापारी सरकारी खरीद पर गेहूं की खरीद कर सकेंगे, जिनके पास लाइसेंस है। साथ ही पूर्व में कोई आढ़त बकाया नहीं हो। किसी भी व्यापारी को पूर्व का कोई क्लेम देय नहीं होगा। गेहूं खरीद के दौरान व्यापारियों के साथ ही सरकार के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहेंगे। किसान की फसल का भुगतान सरकार की ओर से किया जाएगा।
एक अप्रेल से मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होगी। इसके लिए किसानों को सरकारी वेबसाइट पर गेहूं खरीद के लिए आवेदन करना होगा। अगर कोई किसान आवेदन नहीं करता है तो उसका आवेदन ऑन स्पॉट मंडी में किया जा सकेगा। व्यापारी किसान का टोकन जारी कर सकता है।
टोकन के लिए किसान को अपना जनाधार, आधार कार्ड की कॉपी, बैंक पासबुक एवं गिरदावरी की कॉपी साथ में लानी होगी। मंडी अध्यक्ष सत्यविजय गुप्ता ने बताया कि सभी व्यापारी किसान का माल तोलने से पहले किसान से टोकन प्राप्त करेंगे। यह सूचना प्राप्त करनी होगी कि आवेदन के अनुसार ही किसान का माल खरीदा है। किसानों के गेहूं को आढ़तियों के माध्यम से तोलने वाली सभी दुकानदारों को अपनी केवाईसी करानी होगी।
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