अलवर

परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने पृथ्वी को बचाने के लिए दिया यह सुझाव, आप भी जानिए

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Sep 24, 2018
परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने पृथ्वी को बचाने के लिए दिया यह सुझाव, आप भी जानिए

विश्व विख्यात परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती का कहना है कि पीढिंयों को बचाना है तो पृथ्वी को बचाना होगा। हम क्रिएटर की उपासना करते हैं लेकिन क्रिएशन का क्या है? उसने जो समाज बनाया है उसका भी ध्यान रखें। पेड़ बचेंगे तो पर्यावरण बचेगा, पर्यावरण बचेगा तो प्राण बचेंगे। पीढिय़ां बचें न बचें लेकिन इस पृथ्वी को बचाना होगा क्योंकि पृथ्वी बचेगी तभी पीढिय़ां बचेंगी। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाएं। पेड़ कटें नहीं यह प्रयास और संस्कार होना जरूरी है। यह पेड़ से पीढिय़ों को बचाने की यात्रा है। स्वामी चिदानंद सोमवार को कुछ घंटे के लिए अलवर आए थे।

श्रीरामकथा में शामिल होने आए स्वामी ने राजस्थान पत्रिका से विशेष बात की। उन्होंने पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाली परंपराओं और संस्कारों में धर्मानुकूल परिवर्तन की बात कही। गणपति विसर्जन, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में बड़े बदलाव का संदेश भी दिया। कथा इंटरनेट से जोड़ती है: स्वामी ने कहा कि नई पीढ़ी को संस्कार देना जरूरी है। घर पर मां ही सबसे पहला गुरु है। परिवारों के माध्यम से संस्कार का उदय होता है। बच्चे इंटरनेट से पूरे जगत का ज्ञान ले सकते हैं पर कथा रूपी इनरनेट से हमें अंतस का ज्ञान होता है। इसके लिए परिवार के संस्कार जरूरी हैं।

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बड़ी चिंता
हर साल 8 करोड़ पेड़ अंतिम संस्कार के लिए ही कट जाते हैं

स्वामी ने चिंता जताते हुए कहा कि अंतिम संस्कार में लकड़ी का इस्तेमाल होता है। हम पेड़ लगाने भूल गए लेकिन इस संस्कार में हर साल देश में करीब 8 करोड़ पेड़ कट जाते हैं। इसके साथ ही पूरी की पूरी अस्थियां गंगा में प्रवाहित होती हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है उसकी भरपाई संभव नहीं है।

उपयोग सुझाव
गाय गोबर से हो अंतिम संस्कार

स्वामी ने बताया कि इसके लिए मशीनें तैयार करवाई गई हैं। कई शहरों में प्रयोग शुरू हो गए हैं। इसमें गोबर को कंप्रेस कर लकड़ी सरीखा स्वरूप बन जाता हैै। इसकी ज्वलनशीलता भी अपेक्षाकृत अधिक होती है। इससे गोवंश का महत्व बढ़ेगा। जो दूधारू गोवंश नहीं है वह भी उपयोगी माना जाएगा। देश भर मेें यह प्रक्रिया शुरू होने से हम पर्यावरण में बहुत बड़ा योगदान देंगे।

ऐसे होगा प्रचार

बिलों से नहीं दिलों से होगी बात

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अंतिम संस्कार में गोबर की काष्ठ के प्रयोग की प्रक्रिया संसद के बिलों से शुरू नहीं होगी। इसे आमजन के दिलों से शुरू करवाना होगा। इसके लिए अब कुंभ मेले से सभी संत यह बात रखेंगे। कई जगह यह शुरूआत हो चुकी है।

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Published on:
24 Sept 2018 11:36 am
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