पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने अब आम आदमी की बचत को खत्म कर दिया है। माल ढुलाई महंगी होने के कारण बाजार में फल, राशन, साइकिल और लैपटॉप जैसी तमाम जरूरी चीजों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में कई जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। फलों से लेकर चावल-दाल, साइकिल और लैपटॉप तक महंगे हो गए हैं। वहीं, स्कूल बसों और टैक्सियों के किराए में भी इजाफा होने लगा है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों की मासिक बजट व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
व्यापारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। इसका सीधा असर बाजार तक पहुंचने वाले सामान की कीमतों पर पड़ रहा है। खासकर बाहर से आने वाले फल और खाद्य सामग्री अब पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य वस्तुओं की परिवहन लागत बढ़ने से उनके दामों में भी वृद्धि हुई है। लोगों का कहना है कि अब छोटी-छोटी जरूरतों पर भी अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है क्योंकि स्कूल बस और टैक्सी संचालकों ने किराया बढ़ाना शुरू कर दिया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईंधन कीमतों में राहत नहीं मिलती है तो आने वाले दिनों में अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में भी और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
फल बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। व्यापारियों के अनुसार परिवहन खर्च बढ़ने से फलों के दामों में करीब 5 रुपए प्रति किलो तक का उछाल आया है। बाहर से आने वाले सेब, केला और अन्य फलों की कीमतों पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। ग्राहकों का कहना है कि रोजमर्रा की खरीदारी का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि सब्जियां लोकल स्तर पर ही आती हैं, इसलिए दाम अभी स्थिर हैं।
साइकिल के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। बाजार में विभिन्न मॉडल की साइकिलें 200 से 500 रुपए तक महंगी हो गई हैं। दुकानदारों का कहना है कि साइकिल का 80 प्रतिशत हिस्सा लोहे से बना है और लोहे के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से दाम बढ़े हैं। इसके अलावा टायर-ट्यूब और अन्य एक्सेसरीज के दामों में बढ़ोतरी की वजह से साइकिल महंगी हुई है।
रसोई का बजट भी प्रभावित हुआ है। चावल और दाल के दामों में करीब 4 से 5 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। किराना व्यापारियों के अनुसार माल ढुलाई और भंडारण खर्च बढ़ने का असर खाद्य सामग्री की कीमतों पर पड़ रहा है। गृहिणियों का कहना है कि रसोई खर्च लगातार बढ़ने से घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक बाजार भी महंगाई से अछूता नहीं है।
लैपटॉप की कीमतों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुकानदारों का कहना है कि आयात लागत और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से कंपनियों ने कीमतों में बदलाव किया है। ऑनलाइन पढ़ाई, ऑफिस कार्य और डिजिटल जरूरतों के कारण लैपटॉप की मांग बनी हुई है, लेकिन बढ़ी कीमतों ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है।
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर स्कूल परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा है। कई निजी स्कूल बस संचालकों और टैक्सी चालकों ने किराए में इजाफा किया है। अभिभावकों का कहना है कि पहले फीस बढ़ी थी और अब परिवहन खर्च बढ़ गया है। परिवार पालना मुश्किल हो चला है।