
अलवर। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ अब उच्च शिक्षा का ढांचा भी बिगड़ता जा रहा है। कॉलेजों में विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले स्थाई प्रोफेसरों की कमी चल रही है। प्रदेश में पिछली कांग्रेस सरकार की ओर से नए कॉलेजों को खोला गया है। अब इन कॉलेजों का आलम इस प्रकार से है कि दो-तीन प्रोफेसरों के भरोसे ही कॉलेज को संभाला जा रहा है। कॉलेजों में स्थाई स्टॉफ नहीं होने के कारण विद्या संबल के माध्यम से प्रोफेसरों की नियुक्ति आयुक्तालय ने की। अब इन प्रोफेसरों के ऊपर रोजगार का संकट मंडरा रहा है। क्योंकि महज 27 दिनों के बाद विद्या संबल के माध्यम से नियुक्त किए गए प्रोफेसरों का समय पूरा हो जाएगा। उसके बाद बेरोजगार हो जाएंगे।
पहले से नियुक्त प्रोफेसरों को लेकर कोई नोटिफिकेशन नहीं
आयुक्तालय ने अब तक विद्या संबल के माध्यम से पढ़ाने वाले प्रोफेसरों की नियुक्ति के आदेश जारी नहीं किए हैं और न ही अब तक कोई नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रदेश में विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों की संख्या एक हजार है। हालांकि, वहीं, विद्या संबल योजना के माध्यम से प्रोफेसरों की भर्ती जारी है। इसको पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगेगा। ये भर्ती एक हजार 900 पदों पर चल रही है।
ये है स्थिति:
प्रदेश की 190 कॉलेजों में विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों के द्वारा विद्यार्थियों को पढाया जा रहा है। इनकी संख्या एक हजार है। अब इनका कार्यकाल पूरा होने वाला है। आयुक्तालय की ओर से विद्या संबल के माध्यम नोडल कॉलेज और राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के माध्यम से कॉलेजों में नियुक्ति की गई। वहीं, सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों को हटा दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होगी। राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में भी विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले प्रोफेसरों की कमी चल रही है।
सत्र प्रभावित होने की संभावना
प्रदेश में इस सत्र से पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर पद्धति को लागू किया गया। ऐसी स्थिति में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं के बाद फिर से दूसरे सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। ये आदेश जयपुर विश्वविद्यालयों की ओर से जारी किए गए हैं। वहीं, अगर विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों को हटा दिया गया तो आगे आने वाला सत्र प्रभावित होगा।