
अलवर. भिवाड़ी नगर परिषद में जिस बाबू प्रदीप घीया से दूसरे को चार्ज दिलवाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी थी उसे अलवर नगर परिषद में आते ही बड़ा ईनाम दिया गया है। यहां उसे मुख्य सफाई निरीक्षक के अलावा दो सेक्टरों का प्रभारी बनाया है। जबकि भिवाड़ी में रहते समय तबादले के बाद भी चार्ज देने का तैयार नहीं हुआ। करीब एक माह तक 200 से 250 फाइलें दबाकर बैठा रहा। आखिर में पुलिस बुलाई और दूसरे को कार्यभार संभलवाया गया।
जबसे यह फेरबदल हुआ है नगर परिषद के भीतर व बाहर यही चर्चा का विषय है। जबकि नगर परिषद में लिपिकीय क्षेत्र के कर्मचारी को तकनीकी काम की जिम्मेदार कम ही दी जाती है। यहां कई वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारियों को छोड़ उन्हें आगे लाया गया है। जिन पर पहले से कई आरोप भी हैं। जबकि इस बारे में नगर परिषद सभापति व आयुक्त को भी जानकारी है।
कई बार नोटिस भी दिए
भिवाड़ी नगर परिषद से लिपिक घीया का तबादल होने के बाद जब कार्यभार नहीं दिया तो आयुक्त ने कई नोटिस दिए। विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखा। आखिर में पुलिस को बुलाकर कार्यभार दूसरे कर्मचारी को दिलवाया। ज्यादातर फाइलें भी उनसे ली गई।
बाबू के तबादला होने के बाद भी दूसरे व्यक्ति को कार्यभार नहीं देने के मामले में पुलिस नगर परिषद भिवाड़ी गई थी। इसके बाद सम्बंधित लिपिक ने रिकॉर्ड संभलवाया था। नगर परिषद अधिकारियों की शिकायत पर गए थे।
विक्रांत, थानाधिकारी, फूल बाग भिवाड़ी
ऐसा कुछ नहीं है कार्यभार देने में समय तो लगता है। पुलिस के आने का मुझे नहीं मालूम। अलवर में सीएसआई के पद पर लगाने का निर्णय नगर परिषद प्रशासन का है।
प्रदीप घीया, लिपिक नगर परिषद अलवर
लिपिक के बारे में पुरानी जानकारी नहीं है। हमें ठीक काम कराने के लिए किसी को जिम्मेदारी देनी होती है। दूसरे कर्मचारी इतनी भागदौड़ नहीं कर पाते। इसलिए इनको चार्ज दिया है।
संजय शर्मा, आयुक्त, नगर परिषद अलवर
ऐसी मनमर्जी बर्दाश्त नहीं करेंगे जिससे पहले पूरा भिवाड़ी परेशान रहा। भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। उसी को चार्ज देने का मतलब अधिकारियों की मिलीभगत है।
नरेन्द्र मीणा, नेता प्रतिपक्ष, नगर परिषद अलवर