कोरोना के बाद से स्पेशल ट्रेन के नाम पर यात्रियों की जेब पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। कम दूरी के स्टेशनों के लिए भी अधिक राशि ली जा रही है।
अलवर. कोरोना की शुरुआत से अब तक ट्रेनों की स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। रेलवे की ओर से कुछ ट्रेनें तो चलाई जा रही हैं लेकिन उनका किराया ही आम आदमी के बजट के बाहर है। स्पेशल ट्रेनों के किराए तय करने में एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की दूरी का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा। स्थिति यह है कि अलवर जंक्शन से मात्र 26 किलोमीटर दूर खैरथल और 38 किलोमीटर दूर राजगढ़ के लिए स्लीपर क्लास के 415 रूपए वसूले जा रहे हैं। यह किराया सुपरफास्ट ट्रेन का है। जबकि रानीखेत, बरेली, जम्मूतवी-बाड़मेर आदि एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया 145 रूपए है। सिटिंग के लिए भी 60 से 90 रूपए तक लिए जा रहे हैं। यहां गौर करने वाली बात है कि अलवर से जयपुर के लिए भी स्लीपर श्रेणी का यही किराया है। जबकि सिटिंग में 15 से 20 रूपए अधिक लिए जा रहे हैं।
बिना आरक्षण यात्रा की अनुमति नहीं
स्पेशल ट्रेनों में अधिक किराया देना मजबूरी बन जाती है। क्योंकि इन दिनों बगैर आरक्षण के ट्रेनों में यात्रा करने की अनुमति नहीं है। अनलॉक होने के साथ समीपवर्ती कस्बों से दैनिक यात्रियों का आवागमन शुरू हुआ है। लेकिन उनके लिए ट्रेनों की सुविधा नहीं है। हालांकि 18 जून से मथुरा-भिवानी पैसेंजर का संचालन होगा। लेकिन इसमें भी स्पेशल ट्रेन के मुताबिक अधिक किराया वसूला जाएगा। अलवर शहर के लिए खैरथल, हरसौली, बावल, रेवाड़ी सहित राजगढ़, मालाखेड़ा और बांदीकुई से प्रतिदिन 5 हजार से अधिक यात्री दैनिक यात्रा करते थे। अलवर आने वाले व्यापारी, नौकरीपेशा, मजदूर वर्ग पैसेंजर रेल नहीं चलने से काफी परेशानियों में यात्रा कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दाम आमजन की जेब का भार बढ़ा रहे हैं। ऐसे में यात्रियों की मांग है कि पूर्व की भांति सामान्य किराया लिया जाए या मासिक पास फिर से शुरू किए जाएं।
गुजरात के लिए दो ट्रेनों का संचालन
पश्चिम रेलवे की ओर से अहमदाबाद-कटरा को 27 जून और कटरा-अहमदाबाद को 29 जून से चलाया जाएगा। वहीं राजकोट-दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस 24 जून व दिल्ली सराय रोहिला-राजकोट एक्सप्रेस को 25 जून से आगामी आदेशों तक चलाने का निर्णय लिया गया है।