
भारतीय रेलवे (Indian Railways) अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को नेक्स्ट जेनरेशन सिस्टम में अपग्रेड कर रहा है। इसी के तहत ट्रेन टिकट के 10 अंकों वाले पीएनआर (PNR Number) की पुरानी सीरीज को बदला जा रहा है। दिसंबर 2026 के तीसरे सप्ताह तक देशभर की सभी ट्रेनों में नई पीएनआर व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। नई व्यवस्था में पीएनआर नंबर की शुरुआत 1, 3, 5 या 7 से होगी।
रेलवे ने इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत देशभर की 1,230 ट्रेनों को चुना है। इसकी शुरुआत लखनऊ से चलने वाली ट्रेन संख्या 14210 से की गई है। इस ट्रेन के टिकटों में अब 500 सीरीज से पीएनआर जारी किए जा रहे हैं। रेलवे धीरे-धीरे पुरानी पीएनआर सीरीज को नई माइग्रेटेड व्यवस्था में बदल रहा है। ट्रेन 14210 लखनऊ से प्रयागराज संगम के बीच चलती है।
रेलवे में कंप्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली शुरू होने के बाद वर्ष 1986 से 10 अंकों वाले पीएनआर का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक पीएनआर के शुरुआती अंकों के आधार पर अलग-अलग डेटाबेस सेंटर और क्षेत्र की पहचान होती थी। रेलवे के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में प्रमुख डेटाबेस सेंटर रहे हैं। पुरानी व्यवस्था में दिल्ली सेंटर से जुड़े पीएनआर 2, कोलकाता के 6, मुंबई के 8 और चेन्नई के 4 से शुरू होते थे।
रेलवे ने आरक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन पीआरएस (Next Generation PRS) तैयार किया है। नए सिस्टम से टिकट बुकिंग और आरक्षण से जुड़ी जानकारी को ज्यादा तेजी से संभालने में मदद मिलेगी। सीट उपलब्धता, किराया और बर्थ से जुड़ी जानकारी भी एक ही प्रक्रिया में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसी तकनीकी बदलाव के चलते पुरानी पीएनआर सीरीज को नई व्यवस्था में माइग्रेट किया जा रहा है।
नई व्यवस्था में पुराने टिकट से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम यात्रियों को ध्यान रखना होगा। यदि टिकट पुराने सिस्टम में बुक किया गया है और माइग्रेशन के बाद उसमें यात्रा की तारीख बदलनी है, तो पुराने टिकट को रद्द कराकर नए सिरे से रिजर्वेशन कराना पड़ेगा। इसलिए ऐसे यात्रियों को टिकट में बदलाव कराने से पहले नई व्यवस्था के नियमों की जानकारी लेना जरूरी होगा। भारतीय रेलवे (Indian Railways) अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को नेक्स्ट जेनरेशन सिस्टम में अपग्रेड कर रहा है। इसी के तहत ट्रेन टिकट के 10 अंकों वाले पीएनआर (PNR Number) की पुरानी सीरीज को बदला जा रहा है। दिसंबर 2026 के तीसरे सप्ताह तक देशभर की सभी ट्रेनों में नई पीएनआर व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। नई व्यवस्था में पीएनआर नंबर की शुरुआत 1, 3, 5 या 7 से होगी।
रेलवे ने इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत देशभर की 1,230 ट्रेनों को चुना है। इसकी शुरुआत लखनऊ से चलने वाली ट्रेन संख्या 14210 से की गई है। इस ट्रेन के टिकटों में अब 500 सीरीज से पीएनआर जारी किए जा रहे हैं। रेलवे धीरे-धीरे पुरानी पीएनआर सीरीज को नई माइग्रेटेड व्यवस्था में बदल रहा है। ट्रेन 14210 लखनऊ से प्रयागराज संगम के बीच चलती है।
रेलवे में कंप्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली शुरू होने के बाद वर्ष 1986 से 10 अंकों वाले पीएनआर का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक पीएनआर के शुरुआती अंकों के आधार पर अलग-अलग डेटाबेस सेंटर और क्षेत्र की पहचान होती थी। रेलवे के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में प्रमुख डेटाबेस सेंटर रहे हैं। पुरानी व्यवस्था में दिल्ली सेंटर से जुड़े पीएनआर 2, कोलकाता के 6, मुंबई के 8 और चेन्नई के 4 से शुरू होते थे।
रेलवे ने आरक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन पीआरएस (Next Generation PRS) तैयार किया है। नए सिस्टम से टिकट बुकिंग और आरक्षण से जुड़ी जानकारी को ज्यादा तेजी से संभालने में मदद मिलेगी। सीट उपलब्धता, किराया और बर्थ से जुड़ी जानकारी भी एक ही प्रक्रिया में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसी तकनीकी बदलाव के चलते पुरानी पीएनआर सीरीज को नई व्यवस्था में माइग्रेट किया जा रहा है।
नई व्यवस्था में पुराने टिकट से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम यात्रियों को ध्यान रखना होगा। यदि टिकट पुराने सिस्टम में बुक किया गया है और माइग्रेशन के बाद उसमें यात्रा की तारीख बदलनी है, तो पुराने टिकट को रद्द कराकर नए सिरे से रिजर्वेशन कराना पड़ेगा। इसलिए ऐसे यात्रियों को टिकट में बदलाव कराने से पहले नई व्यवस्था के नियमों की जानकारी लेना जरूरी होगा।