कुछ साल पहले तक उपभोक्ता भंडार की दवा की दुकानों पर प्रतिमाह करीब एक करोड़ की दवाएं बेची जा रही थी। जो घटकर 12 लाख रह गई है।
Alwar News: अलवर। सहकारी उपभोक्ता भंडार की खराब माली हालत ने दवा की दुकानों पर लगे फार्मासिस्ट की चिंता बढ़ा दी है। विभागीय अनियमितताओं के चलते करीब 2 साल में ही उपभोक्ता भंडार की दवा की दुकानों की सेल करीब 85 प्रतिशत तक कम हो गई। लेकिन संस्था की आर्थिक स्थिति खराब होने से 23 फार्मासिस्ट का 14 माह से वेतन बकाया है। इसके कारण उनके परिवारों के आगे आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है।
कुछ साल पहले तक उपभोक्ता भंडार की दवा की दुकानों पर प्रतिमाह करीब एक करोड़ की दवाएं बेची जा रही थी। जो घटकर 12 लाख रह गई है। इन दुकानों पर ब्रांडेड तो दूर सामान्य दवाओं तक का टोटा रहा। उधर, सामान्य अस्पताल के पीछे बनी उपभोक्ता भंडार की 5 दुकानों तक पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। यही कारण रहे, जिसकी वजह से सेल में कमी आई है। लेकिन इसका खामियाजा सीधे तौर पर फार्मासिस्ट को भुगतना पड़ रहा है।
राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय परिसर में प्राइम लोकेशन पर बनी सरकारी उपभोक्ता भंडार की दुकान नंबर 8 करीब डेढ़ साल से बंद पड़ी हैं। उपभोक्ता भंडार की ओर से औषधि विभाग को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के कारण दुकान का ड्रग लाइसेंस भी जारी नहीं हो सका है।
अलवर शहर के सामान्य अस्पताल में उपभोक्ता भंडार की 5 दवा की दुकानें संचालित हैं। इनमें से एक दुकान आयुर्वेद दवा की है। इसके अलावा काला कुआं, जगन्नाथ मंदिर, शिवाजी पार्क व एनईबी डिस्पेंसरी में उपभोक्ता भंडार की एक-एक दवा की दुकानें हैं। मालाखेड़ा, राजगढ़, खेरली, कठूमर, गोविंदगढ़, कोटकासिम, बानसूर, किशनगढ़बास, तिजारा, थानागाजी और लक्ष्मणगढ़ में भी एक-एक दुकान चल रही हैं।
सरकारी उपभोक्ता भंडार के 5 करोड़ रुपए ट्रेजरी और आरजीएचएस में करीब ढाई करोड़ रुपए अटके हुए हैं। इसके कारण फार्मासिस्ट के भुगतान में परेशानी आ रही है। अभी हमने एक महीने में 2 लाख की सेल बढ़ाई है। जिसे आगामी दिनों में 20 लाख तक ले जाने के लक्ष्य पर कार्य कर रहे हैं।
-प्रकाश नारायण झा, कार्यवाहक जनरल मैनेजर, अलवर सहकारी उपभोक्ता भंडार।