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राजस्थान रोडवेज की खटारा बसों में है जुगाड़ की संजीवनी, इस तरह खराब बसों से चल रहा है काम

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Aug 13, 2018
Rajasthan Roadways Using Jalopy bus Parts in it's Buses
राजस्थान रोडवेज की खटारा बसों में है जुगाड़ की संजीवनी, इस तरह खराब बसों से चल रहा है काम

लम्बे समय से नई बसों की खरीद नहीं होने से रोडवेज की ज्यादातर बसें बूढ़ी व खटारा हो चुकी हैं। इन बसों को रोडवेज जुगाड़ की ‘संजीवनी’ से दौड़ा रहा है। सच्चाई ये है कि एक खटारा व बूढ़ी बस को दुरुस्त करने के लिए दूसरी बस की बलि दी जा रही है। वर्कशॉप में मरम्मत के लिए पहले से खड़ी बसों के पाट्र्स खोलकर दूसरी बसों में लगाए जा रहे हैं।

दरअसल, रोडवेज की ज्यादातर वर्कशॉप में पाट्र्स की भी कमी बनी हुई है। ऐसे में जुगाड़ से बसों की मरम्मत हो रही है। जिन बसों के पाट्र्स खोलकर दूसरी बसों में लगाए जा रहे हैं, उनमें ज्यादातर वे बसें शामिल हैं, जो या तो कंडम घोषित हो चुकी हैं अथवा कंडम की कतार में हैं। ऐसे में वर्कशॉपों में खराब बसों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। रोडवेज के अलवर व मत्स्य नगर डिपो की बात करें तो अलवर डिपो में वर्तमान में 25 कंडम बसें खड़ी हैं। वहीं, मत्स्य नगर में भी कंडम बसों की संख्या 23 है।

किसी के टायर गायब तो किसी का शीशा

रोडवेज के अलवर व मत्स्य नगर आगार में खड़ी खटारा व कंडम बसों का हाल ये है कि किसी का टायर गायब है तो किसी का शीशा। किसी का गेट नहीं है तो किसी का गियर बॉक्स। स्थिति ये है कि इन्हें अब चलाकर नहीं बल्कि खींचकर ही ले जाया जा सकता है। रोडवेज के अजमेर स्थित वर्कशॉप ने भी इन्हें लेने से मना कर दिया, इसलिए अब ये बसें वर्कशॉप की शोभा बनी हुई हैं।

मुख्यालय से पाट्र्स भेजना लगभग बंद

कर्मचारियों की मानें तो रोडवेज ने अनुबंधित बसों को अधिक काम में लेने के कारण पाट्र्स भेजना लगभग बंद कर दिया है। इसकी जगह रोडवेज अब खुद की बसों को वर्कशॉप में खड़ी कर उनके पाट्र्स खोलकर उन्हें कंडम करने में जुटा हुआ है।

वर्कशॉपों में पाट्र्स की कमी बनी हुई है। मुख्यालय से पाट्र्स कम आ रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा बसों को रूट पर चलाने को लेकर कुछ कंडम बसों के पाट्र्स भी खोले गए। वैसे कंडम बसें अब जल्द अजमेर जाएंगी। इनके कागज आदि तैयार हो
रहे हैं।
-मनोहरलाल शर्मा, मुख्य प्रबंधक अलवर आगार।

Published on:
13 Aug 2018 10:17 am