
अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है राजस्थान रोडवेज, यात्रियों को नहीं मिल रही है सुविधाएं
रोडवेज की गाड़ी एकबार फिर पुराने ढर्रे पर चल पड़ी है। चालक-परिचालकों की कारगुजारी रोकने को लेकर रोडवेज ने करीब एक दशक पहले मशीन से टिकट काटने की व्यवस्था शुरू की, लेकिन यह व्यवस्था अब पटरी से उतर गई है। स्थिति ये है कि अब ज्यादातर रोडवेज बसों में फिर से हाथ से टिकट काटे जा रहे हैं। इसका कारण टिकट काटने की मशीनों का खराब होना है।
दरअसल, रोडवेज ने ई-टिकटिंग मशीनों की रिपयेरिंग का जयपुर स्थित एक फर्म को ठेका दिया हुआ था, जो कि अब समाप्त हो गया है। मुख्यालय की ओर से रिपयेरिंग का नया ठेका नहीं दिए जाने के कारण अलवर सहित प्रदेश के समस्त डिपो में टिकट काटने का संकअ बना हुआ है। मजबूरन रोडवेज को पुराने ढर्रे पर उतर हाथ से टिकट बनाने पड़ रहे हैं।
अलवर में आधी मशीनें खराब
अगर अलवर की बात करें तो यहां रोउवेज के दोनों आगारों में आधी से ज्यादा मशीनें खराब पड़ी हैं। मत्स्य नगर आगार में 131 मशीनों में से 50 मशीनें वर्तमान में खराब हैं। इसके चलते परिचालकों को टिकट बुक देकर रूट पर भेजा जा रहा है। ऐसी ही स्थिति अलवर आगार की हैं। यहां भी 159 में से लगभग आधी मशीनें खराब पड़ी है। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो वे रोज 10-12 मशीनें सही होने के लिए मुख्यालय भेजते हैं, लेकिन उनके बदले 2-4 मशीनें ही मुख्यालय से वापस आती हैं।
सामान का भी पड़ा टोटा
रोउवेज में चालक-परिचालकों को न नई मशीनें मिल पा रही हैं और न पुरानी दुरुस्त होकर आ रही है। स्थिति ये है कि रोडवेज में मशीनों के पाट्र्स का भी टोटा बना हुआ है। अलवर आगर की करीब 33 मशीनें खराब होकर लम्बे समय से मुख्यालय पड़ी हैं। इनमें बदले नई मशीनें नहीं आई है। वहीं, 26 मशीनें पाट्र्स के अभाव में दम तोड़ गई है। मशीनों के खराब होने से चालक-परिचालकों की निकल पड़ी हैं, वहीं रोडवेज को राजस्व से हाथ धोना पड़ रहा है।
मुख्यालय स्तर पर मशीनों की रिपयेरिंग का टेण्डर दिया हुआ था, जो अब समाप्त हो गया है। नया टेण्डर नहीं होने एवं पाट्र्स की आपूर्ति नहीं होने से यह समस्या आ रही है। टिकट बुक से रोडवेज को कम राजस्व मिल रहा है, लेकिन कर क्या सकते हं।
मनोहरलाल शर्मा, मुख्य प्रबंधक अलवर आगार।
Published on:
10 Aug 2018 12:41 pm
