अलवर

Rajgarh News: राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ और माता जानकी का विवाह, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

अलवर के राजगढ़ स्थित गंगाबाग में भगवान जगन्नाथ और माता जानकी परिणय सूत्र में बंध गए। इस अलौकिक विवाह और भव्य वरमाला महोत्सव के हजारों श्रद्धालु गवाह बने। विवाह के बाद बारातियों के लिए भव्य स्नेह भोज का आयोजन भी किया गया।
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Jul 21, 2026
rajgarh lord jagannath
राजगढ़ जगन्नाथ मेेले की फोटो (फोटो - पत्रिका)

राजगढ़ कस्बे के गंगाबाग में चल रहे ऐतिहासिक जगन्नाथ मेले के चौथे दिन वरमाला और कन्यादान महोत्सव की धूम रही। चौपड़ बाजार स्थित जगदीश मंदिर से देर शाम गाजे-बाजे के साथ माता जानकी की सवारी निकली, जिसका गंगाबाग पहुंचने पर पुष्पवर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। इसके बाद मंदिर के महंत पूरण दास और पंडित मदन मोहन शास्त्री की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ।

दिल्ली-जयपुर से आई 11-11 फीट की मोगरे की माला

भगवान जगन्नाथ और माता जानकी के परिणय उत्सव को खास बनाने के लिए दिल्ली और जयपुर से विशेष रूप से मोगरे व चांदी के फूलों से तैयार 11-11 फीट की भव्य वरमालाएं मंगवाई गई थीं। दोनों की अलौकिक झांकी के दर्शन के लिए मेला परिसर जयकारों से गूंज उठा। इस शुभ अवसर पर सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने माता जानकी का भावुक होकर कन्यादान किया। वहीं, दरबार में एडवोकेट विश्वास मित्तल की ओर से आकर्षक फूल बंगला झांकी सजाई गई।


बारातियों का हुआ भव्य स्वागत और भण्डारा

विवाह से पूर्व दोपहर में बारात का स्वागत वधु पक्ष की ओर से महंत प्रकाश दास ने किया। महंत पूरण दास के नेतृत्व में गाजे-बाजे के साथ पहुंची बारात की अगवानी के बाद भव्य भण्डारे (स्नेह भोज) का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंगतों में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। दूल्हा बने भगवान जगन्नाथ की परिक्रमा करने और मनचाही मन्नतें मांगने के लिए तड़के से ही महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।

मेले में हर तरफ उमड़ी जनमेदिनी, झूलों का उठाया आनंद

राजगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों की संख्या में लोग मेले का लुफ्त उठाने पहुंचे। महिलाओं ने श्रृंगार और घरेलू सामान की खरीदारी की, वहीं बच्चों और युवाओं ने ब्रेक डांस, टोरा-टोरा और एडवेंचर झूलों का जमकर मजा लिया।

कीचड़ और फिसलन ने श्रद्धालुओं को किया परेशान

मेले के दौरान हुई बारिश ने थोड़ी अव्यवस्था भी फैलाई। गंगाबाग के मुख्य मार्ग पर चिकनी मिट्टी के कारण काफी कीचड़ और फिसलन हो गई। इसके चलते बुजुर्गों और बच्चों को पैदल चलने में काफी मशक्कत करनी पड़ी और कुछ श्रद्धालु बिना दर्शन किए लौटने को मजबूर हुए।

आयोजकों के अनुसार 21 और 22 जुलाई को भराभर का मेला भरेगा, जिसके बाद 23 जुलाई (आषाढ़ शुक्ला नवमी) की रात भगवान जगन्नाथ अपनी दुल्हन जानकी मैया के साथ वापस मुख्य मंदिर लौटेंगे।

Updated on:
21 Jul 2026 02:52 pm
Published on:
21 Jul 2026 02:52 pm