राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर से जुड़े करीब 200 कॉलेजों को अब अधिक संबद्धता शुल्क (एफिलेशन फीस) देना होगा। विश्वविद्यालय ने इस शुल्क में करीब 33 फीसदी बढ़ोतरी कर दी है। इससे निजी कॉलेज संचालकों में नाराजगी है।
राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर से जुड़े करीब 200 कॉलेजों को अब अधिक संबद्धता शुल्क (एफिलेशन फीस) देना होगा। विश्वविद्यालय ने इस शुल्क में करीब 33 फीसदी बढ़ोतरी कर दी है। इससे निजी कॉलेज संचालकों में नाराजगी है। ऑल राजस्थान प्राइवेट कॉलेज फेडरेशन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. कर्ण सिंह चौधरी का कहना है कि सभी निजी कॉलेजों की संबद्धता फीस में 33 प्रतिशत बढ़ोतरी अनुचित है।
इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। यदि फीस में संशोधन नहीं किया गया, तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। इधर, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक गोपाल कालरा का कहना है कि बॉम की बैठक और राजस्थान विश्वविद्यालय के अनुसार एफिलेशन फीस जाम कराने का नोटिफिकेशन जारी किया है। निजी कॉलेज पिछले दो साल से फीस जमा नहीं करवा रहे हैं। वे कोर्ट से स्टे ले आते हैं। शुल्क में हर साल 10 प्रतिशत इजाफा होता है।
दरअसल, एफिलेशन फीस अथवा संबद्धता शुल्क वह राशि है, जो कोई कॉलेज या शैक्षणिक संस्थान किसी विश्वविद्यालय या बोर्ड से मान्यता प्राप्त करने के लिए जमा करता है। निजी कॉलेजों को 15 मई तक सामान्य फीस जमा करनी होगी। इसके बाद 22 मई तक डबल फीस और 29 मई तक ट्रिपल फीस के साथ जमा कराने का प्रावधान है। निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि नियमानुसार फीस में 5 से 10 प्रतिशत तक ही वृद्धि की जा सकती है।
इतनी ज्यादा बढ़ोतरी सीधे तौर पर कॉलेजों और विद्यार्थियों पर आर्थिक भार डालेगी। निजी कॉलेज संचालकों और ऑल राजस्थान प्राइवेट कॉलेज फेडरेशन सोसायटी ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि अब तक राजस्थान विश्वविद्यालय ने भी एक साथ इतनी बड़ी फीस वृद्धि नहीं की। उच्च न्यायालय की ओर से पूर्व में शुल्क वृद्धि पर दिए गए स्थगन आदेश के बावजूद यह बढ़ोतरी न्यायिक निर्देशों के विपरीत है। इसके अलावा जीएसटी पर स्टे होने के बावजूद विश्वविद्यालय की ओर से जीएसटी वसूले जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय के अंतर्गत डिग्री कॉलेजों की एफिलेशन फीस पिछले वर्ष 1.77 लाख रुपए थी, जिसे बढ़ाकर अब 2.43 लाख रुपए कर दिया गया है। वहीं, बीएड कॉलेजों की फीस 2.86 लाख रुपए से बढ़ाकर 3.98 लाख रुपए कर दी गई है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष अलग है। अधिकारियों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2023–24 में 10 प्रतिशत फीस बढ़ाई गई थी। इसके बाद 2024–25 में निजी कॉलेजों द्वारा स्टे लेने के बावजूद 10 प्रतिशत वृद्धि की गई और 2025–26 में भी 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है। इस प्रकार कुल मिलाकर करीब 30 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जिसे नियमानुसार बताया जा रहा है।