फिट रहना किसे पसंद नहीं। हर उम्र का व्यक्ति यही चाहता है कि वह स्वस्थ और फिट रहे। कोराना के बाद लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक हुए है। लोगों को सेहतमंद रखने के उद्देश्य से हीअलवर के बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय के खेल मैदान में नौ लाख रुपए खर्च कर रनिंग ट्रैक का निर्माण कराया जा रहा है।
अलवर के बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय के खेल मैदान में नौ लाख रुपए खर्च कर रनिंग ट्रैक का निर्माण कराया जा रहा है। ट्रैक बनने के बाद शहर के धावकों को दौड़ के अभ्यास के लिए एक और बेहतर विकल्प मिलेगा। अभी तक शहर के इंदिरा गांधी स्टेडियम और राजर्षि महाविद्यालय खेल मैदान में ही ट्रैक की सुविधा उपलब्ध थी। ऐसे में यह शहर का तीसरा प्रमुख रनिंग ट्रैक होगा। बजट घोषणा के तहत इसका निर्माण किया जा रहा है।
यह ट्रैक आसपास रहने वाले युवाओं के लिए लाभकारी साबित होगा। साथ ही, रोजाना मॉर्निंग व ईवनिंग वॉक करने वाले लोगों को भी दूर नहीं जाना पड़ेगा। खास बात यह है कि इंदिरा गांधी स्टेडियम में बिना टिकट के प्रवेश नहीं है। ऐसे में यहां बेरोकटोक लोगों को एंट्री मिलेगी। लोगों को अपनी सेहत सुधारने के लिए यह ट्रैक फायदेमंद साबित होगा। इसे लेकर आसपास की कॉलोनियों के लोगों में उत्सुकता भी है। कोरोना के बाद से ही लोग अपनी सेहत को लेकर संवेदनशील हैं। यही वजह है कि मॉर्निंग व ईवनिंग वॉक करने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफ हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार भी लगतार वॉकिंग ट्रैक के साथ ही पार्कों में ओपन जिम की व्यवस्था कर रही है।
कला कॉलेज का चुनाव में निर्वाचन विभाग की ओर से अधिग्रहण किया जाता है। यहां ईवीएम और चुनावी सामग्री रखने के लिए व्यवस्थाएं की जाती हैं। इसके चलते मैदानों और भवनों में अस्थायी बदलाव किए जाते हैं। कई बार कमरों और परिसर में तोड़फोड़ के बाद कॉलेज प्रशासन को मरम्मत करवानी पड़ती है। अब नए ट्रैक को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। यदि चुनावों के दौरान मैदान में फिर तंबू और अन्य व्यवस्थाएं की गईं तो ट्रैक को नुकसान पहुंच सकता है।
ट्रैक बनने से जेल सर्किल, तिजारा पुलिया, ट्रांसपोर्ट नगर, रणजीत नगर, शिवाजी पार्क समेत आसपास की कॉलोनियों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अभी तक सुबह-शाम दौड़ लगाने के लिए लोगों को कंपनी बाग, नेहरू उद्यान, आरआर कॉलेज या इंदिरा गांधी स्टेडियम तक जाना पड़ता था। दूरी अधिक होने से समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। अब घर के पास ट्रैक बनने से नियमित अभ्यास आसान होगा और अधिक लोग फिटनेस गतिविधियों से जुड़ सकेंगे। कॉलेज परिसर में खेल गतिविधियां बढ़ने से विद्यार्थियों को भी बेहतर माहौल मिलेगा।