
Sariska Tiger Reserve: अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व को लेकर एक बहुत अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान के रणथंभौर की विश्व प्रसिद्ध बाघिन 'मछली' की तर्ज पर अब सरिस्का के जंगलों और यहां के बाघों की कहानी को बड़े पर्दे पर उतारा जाएगा। इसके लिए केंद्रीय वन मंत्रालय ने देश के जाने-माने वाइल्डलाइफ सिनेमैटोग्राफर और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता नल्लामुथु को विशेष रूप से अलवर आमंत्रित किया है।
केंद्रीय वन मंत्री और अलवर सांसद भूपेंद्र यादव ने रविवार को 'बाघों का पुनर्स्थापन: अवसर व चुनौतियां' विषय पर आयोजित नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की राष्ट्रीय कार्यशाला में यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह बेहद खास मूवी अगले दो साल के भीतर बनकर तैयार हो जाएगी, जिसमें सरिस्का के हर बदलते मौसम के खूबसूरत दृश्यों के साथ-साथ यहाँ के टाइगर की दिन-रात की पूरी लाइफ स्टोरी दिखाई जाएगी।
कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि सरिस्का में बाघों का पुनर्स्थापन केवल एक सरकारी प्रयास नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के पुनर्जागरण, वैज्ञानिक संरक्षण और हम सबके सामूहिक संकल्प की एक बेहद प्रेरक गाथा है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंच से गर्व के साथ आंकड़े साझा करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब सरिस्का में बाघ खत्म हो गए थे, लेकिन पिछले 18 साल की कड़ी मेहनत के बाद आज यहाँ बाघों की संख्या जीरो से बढ़कर 56 हो चुकी है।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस 56 के नंबर से बहुत से लोगों को तकलीफ हो सकती है, लेकिन खुशखबरी यह है कि इसी साल के आखिरी दिनों तक सरिस्का में बाघों का यह आंकड़ा 60 को पार कर जाएगा और आने वाले समय में यह संख्या 100 तक भी पहुंचेगी।
जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण की बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने देश के वनों को बहुत बड़ा प्रोटेक्शन दिया है। सरकार की बेहतरीन नीतियों का ही परिणाम है कि देश में इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की संख्या 8 से बढ़कर अब 504 हो गई है।
उन्होंने अफवाह फैलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी हम फॉरेस्ट रिजर्व को बढ़ाने के लिए जनसुनवाई करते हैं, तो कुछ स्वार्थी लोग अपने निजी फायदे के लिए तरह-तरह की अफवाहें उड़ाने लगते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया कि जो लोग देश और पर्यावरण को बचाने के मिशन के साथ जीवन जीते हैं, उन्हें ऐसी छोटी-मोटी बातों और रुकावटों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देना चाहिए।