
अलवर. सरिस्का में बाघों को बचाने के लिए अब जर्मनी से वीएचएफ रेडियो कॉलर विद जीपीएस आएंगे। इसी माह के अंत तक वीएचएफ रेडियो कॉलर विद जीपीएस सरिस्का पहुंचने की उम्मीद है। पूर्व में बाघों के लगे वीएचएफ तकनीक के रेडियो कॉलर बाघों की मॉनिटरिंग में ज्यादा कारगर नहीं हो पा रहे थे। सरिस्का में बाघों पर मंडराते खतरे को देख सरकार ने उच्च तकनीकी के वीएचएफ रेडियो कॉलर विद जीपीएस मंगाने का निर्णय किया है। जीपीएस रेडियो कॉलर मंगाने का ऑर्डर भी दिया जा चुका है। अगस्त माह के अंत तक इन रेडियो कॉलर के सरिस्का पहुंचने की संभावना है।
वीएचएफ रेडियो कॉलर नहीं बचा सके बाघ-बाघिन
सरिस्का में गत मार्च में फंदे में फंसकर मरे बाघ एसटी-11 के वीएचएफ रेडियो कॉलर लगा था। वहीं पौने 6 माह से गायब चल रही बाघिन एसटी-5 के भी वीएचएफ रेडियो कॉलर लगा है। रेडियो कॉलर लगा होने के बाद भी एसटी-11 को नहीं बचाया जा सका। बाघ इंदौक पहुंच गया और मॉनिटरिंग टीम उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं कर पाई। इसका कारण है कि वीएचएफ रेडियो कॉलर की फ्रिक्वेंसी लेने में कई बार समस्या आती है और सिग्नल मिल भी जाए तो उसकी सही लोकेशन का पता लगाना मुश्किल होता है, जबकि वीएचएफ रेडियो कॉलर विद जीपीएस लगने के बाद मॉनिटरिंग टीम को बाघ की सही लोकेशन पता लग सकेगी।
अभी आधे ही टाइगर के लगे हैं रेडियो कॉलर
सरिस्का में अभी आधे ही बाघों के रेडियो कॉलर लगे हैं। इनमें भी कई बाघों के रेडियो कॉलर सही तरीके से काम नहीं कर रहे। पूर्व में बाघिन एसटी-9 का रेडियो कॉलर खराब हो चुका है। बाघों में सुरक्षित रखने के लिए जीपीएस रेडियो कॉलर की लंबे समय से जरूरत थी।
पहले बाहरी क्षेत्र में घूमने वाले बाघों के लगेंगे
सरिस्का के बाहरी क्षेत्रों में घूमने वाले बाघ-बाघिन के वीएचएफ रेडियो कॉलर विद जीपीएस पहले लगाए जाएंगे। बाद में सरिस्का के अंदरूनी जंगल में विचरण करने वाले टाइगर के वीएचएफ रेडियो कॉलर विद जीपीएस लगाए जाएंगे। सरिस्का में बाघों के लिए जर्मनी से वीएचएफ रेडियो कॉलर विद जीपीएस इसी माह के अंत के आने की उम्मीद है। इन रेडियो कॉलर का ऑर्डर उच्च स्तर पर पहले ही दिए जा चुके हैं। पहले बाहरी क्षेत्र में घूमने वाले बाघों के ये रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे।
हेमंत सिंह, डीएफओ सरिस्का बाघ परियोजना