अलवर के सरिस्का बाघ अभ्यारण के इंदोक गांव में चल रहे माध्यमिक स्कूल के बच्चों को जंगली जानवरों का खतरा है।
एक ओर राज्य सरकार नामांकन बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, इसके बावजूद सरिस्का में बाघों के खतरे के बीच चल रही स्कूल में विद्यार्थियों के लिए बैठने के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं है। सरिस्का के गांव इंदोक के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए न तो बैठने के लिए कमरे हैं न ही पीने के लिए पानी की सुविधा है। ऐसे में छोटे बच्चों को इस भीषण गर्मी में बाहर बैठना पड़ रहा है। पानी की सुविधा नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की परेशानी और भी बढ़ रही है। पहले इस स्कूल में चार दीवारी भी नहीं थी, ऐसे में विद्यार्थियों को जंगली जानवरों का डर सताता था, विद्यार्थियों की इस परेशानी को देखते हुए भामाशाहों ने इस स्कूल की चार दीवारी का निर्माण कराया।
नामांकन बढ़ा फिर भी नहीं सुविधा
राजकीय माध्यमिक विद्यालय के नामांकन में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पहाड़ के नीचे स्थित इस स्कूल में ढाणियों के 250 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। विद्यालय में मात्र पांच कमरे हैं, इन्हीं पांच कमरों में 10 कक्षाओं की पढ़ाई करवाई जा रही है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक व स्टॉफ के लिए केवल एक छोटी कोठरी बनी हुई है।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय इंदोक की हालत पहले और भी ज्यादा खराब थी। विद्यालय में वर्ष 2016 से पहले चार कमरे ही थे। इसके बाद बलाई समाज की ओर से एक कमरे का निर्माण कराया गया। लेकिन फिर भी विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है।
विद्यार्थियों को नहीं मिल रही मूलभूत सविधाएं
राजकीय माध्यमिक विद्यालय इंदोक में पीने के पानी की सुविधा तक नहीं है। विद्यार्थियों को पीने का पानी भी गांव वाले मुहैया करा रहे हैं। विद्यालय में केवल दो शौचालय हैं, ऐसे में बालिकाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्टाफ भी इन्हीं दो शौचालयों का उपयोग करते हैं। विद्यार्थियों के लिए खेल का मैदान भी नहीं है।
बच्चों तक नहीं पहुंच रहा मिड डे मील
यह विद्यालय सरिस्का क्षेत्र के गांव में होने के कारण विद्यार्थियों को मिड -डे मील की सुविधा नहीं मिल पा रही है। बच्चों के लिए स्कूल में ही मिड डे मील तैयार किया जाता है। मिड डे मील को लेकर अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक विद्यार्थियों तक यह सुविधा नहीं पहुंच पाई है।