
डीएनटी (डीनोटिफाइड, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू), वंचित ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों की संघर्ष समिति की ओर से अलवर के रूपबास स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में 12 जून को सुबह 10 बजे सभा का आयोजन किया जाएगा। इसमें 5 हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस सभा को पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राईका संबोधित करेंगे।
सभा के बाद सभी कार्यकर्ता जेल भरो आंदोलन के तहत मिनी सचिवालय पहुंचेंगे। यहां नारेबाजी के बाद कलक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।अलवर डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेंद्र रेबारी ने बताया कि डीएनटी समाज की 32 जातियाें की 11 सूत्रीय मांगें पिछले कई वर्षों से लंबित है। सरकार ने इन मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि पहले भृतहरि धाम पर महासंगम होना था, लेकिन एक समाजबंधु की दुर्घटना में मौत के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। उन्होंने दावा किया अब 100 से अधिक जातियों का समर्थन इस आंदोलन को मिल रहा है। इन समाजों की आरक्षण संबंधी मांगों को भी ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
-सरकारी रिकॉर्ड में सूचीबद्ध डीएनटी जातियों के नामों की त्रुटियां/गलतियां सुधारें और छूटी हुई अन्य जातियों को शामिल करें।
-विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समाजों को सरकारी नौकरी व शिक्षण संस्थानों में अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
-पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों में समाज के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएं।
-समाज के लोग जहां वर्षों से रह रहे हैं, उन आवासों और पशु बाड़ों के नियमित पट्टे जारी करें।
-आवासहीन परिवारों को शहरों में 100 और गांवों में 300 वर्ग गज आवासीय भूमि दी जाए।
-गांवों में पशु बाड़े के लिए अलग से 300 वर्ग गज जमीन आवंटित हो।
-कुल शिक्षा बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से डीएनटी समाज के लिए तय हो।
-बच्चों को कहीं भी पढ़ाई का अधिकार मिले। निजी स्कूलों में प्रवेश में प्राथमिकता मिले और फीस का पुनर्भरण सरकार करे।
-समाज के युवाओं और महिलाओं को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग देकर रोजगार दिया जाए।
-हर साल समाज के एक हजार प्रतिभावान विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर विदेश में हायर एजुकेशन के लिए भेजा जाए।
-डीएनटी समाज के कल्याण के लिए अलग से मंत्रालय और वित्त निगम का गठन हो।
-स्वरोजगार के लिए बिना जटिल कागजी कार्रवाई के आसान लोन सुविधा मिले।
-टीएसपी क्षेत्रों में भी डीएनटी आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
-जोगी और कालबेलिया समाज के लिए अलग से श्मशान भूमि की व्यवस्था की जाए।