अलवर

धौलपुर है पहला प्यार, भरतपुर पुलिस से मोहब्बत, अलवर में सबसे ज्यादा सीखने को मिला-एसपी राहुल प्रकाश

अलवर एसपी राहुल प्रकाश से एक्सक्लूसिव बातचीत।
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Updated: 19 Jul 2018, 11:17 AM IST
Special meeting with SP Rahul Prakash on completion of 2 year
अलवर में 2 साल का कार्यकाल पूरा होने पर एसपी राहुल प्रकाश से विशेष बातचीत

अलवर में अपना दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके एसपी राहुल प्रकाश से पत्रिका ने विशेष बातचीत की। इस दौरान उनसे अलवर में बढ़ते अपराध और उनकी रोकथाम सहित पूर्व के उनके अनुभवों को साझा किया गया। पेश है पत्रिका की खास रिपोर्ट-

सवाल- अलवर जिले में दो साल के कामकाज का अनुभव कैसा रहा?

जवाब- राजस्थान में अलवर जिले का अपना महत्व है। अपराध व अपराध नियंत्रण की दृष्टि से यह जिला महत्वपूर्ण है। अलवर को केवल एक जिले के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यहां अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकृति के अपराध हैं। जनसंख्या व औद्योगिक विकास भी अन्य जिलों से अधिक है। कई राज्यों के प्रवासी भी यहां रहते हैं। अधिक जनसंख्या व विशेष क्षेत्र की बदौलत यह विशेष जिला बन जाता है। अलवर जिले में दो साल के कामकाज का अनुभव बेहद महत्वपूर्ण है। मुझे इस कार्यकाल में सबसे अधिक सीखने को मिला। अलवर जिले में ही सबसे अधिक चुनौतियों का सामना किया।

सवाल- अपराध की दृष्टि से अलवर जिला संवेदनशील माना जाता है। आपका क्या विचार है?

जवाब - दरअसल, अलवर की बहुत बड़ी सीमा हरियाणा से लगी हुई है। अलवर का क्षेत्र भी काफी बड़ा है। इसके चलते यहां अपराध अधिक है और अपराध के मामले भी सबसे अधिक दर्ज होते हैं। यहां एक साल का रजिस्टे्रशन लगभग 18 हजार है। जो कि कई जिलों से कई गुना अधिक है।

सवाल- मेवात क्षेत्र की विशेष समस्या क्या है?

जवाब- मेवात की प्रमुख समस्या एक लाइन में कहूं तो यहां अपराध व अपराधियों को सामाजिक संरक्षण मिला हुआ है। आमतौर पर समाज में अपराधी के प्रति द्वेष का भाव मिलता है, लेकिन मेवात के कुछ छोटे-छोटे ऐसे पॉकेट्स बन गए हैं, जहां अपराधियों को सामाजिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। उसे लोग बुरा नहीं मानते। मेवात के बहुत सारे क्षेत्र अच्छे, विकसित व पढ़े-लिखे लोगों के भी हैं। ऐसे में पुलिस के साथ मेवात समाज के जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बन जाती है कि वे आगे आएं और इस सोच को बदलें।

सवाल- आप भरतपुर व धौलपुर भी रहे। अलवर व इनमें क्या अन्तर लगा?

जवाब- भरतपुर व धौलपुर की संरचना अलवर से अलग है। भरतपुर के बयाना, रूपबास सहित धौलपुर में डांग क्षेत्र आता है। इन क्षेत्रों में पहाडिय़ां हैं, जंगल हैं। फिर अन्य राज्यों की सीमा शुरू हो जाती है। इससे यहां अलग प्रवृत्ति का अपराध होता है।

सवाल- आपको काम करने में सबसे ज्यादा मजा कहां आया?

जवाब- सच कहूं तो मुझे काम में सबसे ज्यादा मजा धौलपुर में आया। आज भी मेरा पहला प्यार धौलपुर है। दरअसल, धौलपुर सबसे अलग है। क्षेत्रफल की दृष्टि से छोटा जिला है, लेकिन वहां के बीहड़ बेहद मुश्किल हैं। वहां ऐसे भूल-भुलैया हैं, जिसके अन्दर पुलिस को घुसकर अपराधियों को पकडऩा होता है। डकैतों का सामना करना व एनकाउंटर करना बेहद मुश्किल है।

सवाल- भरतपुर में कामकाज का अनुभव कैसा रहा?

जवाब- मुझे भरतपुर की पुलिस से खास मोहब्बत है। भरतपुर कार्यकाल के दौरान वहां की पुलिस ने काफी अच्छा कार्य किया। वहां भी काम करने में मजा आया।

आखिरी सवाल- आपकी नजर में अपराध नियंत्रण को लेकर क्या मौलिक प्रयास होने चाहिए?

जवाब- आगे अपराध न हो इस पर चिंतन करना आवश्यक है। कई बार हम देखते हैं कि जो अपराध कर रहे हैं, वे बार-बार पुन: समाज में दिए गए कानून के अन्तर्गत उपचार प्राप्त कर आ-जा रहे हैं। पुन: उनके द्वारा गंभीर अपराध किया जा रहा है। इस सारी प्रक्रिया में एक व्यक्ति की स्वतंत्रता की तो रक्षा होती है, लेकिन बाकी पूरे समाज के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। इस पर गंभीर कानून बनाने की आवश्यकता है।

Updated on:
19 Jul 2018, 11:17 AM IST
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