अलवर

Strawberry Farming Alwar: स्ट्रॉबेरी की खेती बनी अतिरिक्त कमाई का जरिया, एमए के बाद युवक ने शुरू किया नवाचार, हो रहा बढ़िया मुनाफा

Strawberry Farming Alwar: राजस्थान के कई किसान अब परंपरागत खेती से हटकर नकदी फसलों पर फोकस कर रहे हैं। किसान राकेश कुमार ने एमए-बीएड की पढ़ाई के बाद खेती में नवाचार शुरू किया है। उन्होंने 15 बिस्वा जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती की है, जिससे अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

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Apr 15, 2026
अलवर में पैदा हो रही स्ट्रॉबेरी (फोटो-पत्रिका)

अलवर। थानागाजी क्षेत्र में किसान अब कृषि के क्षेत्र में लगातार नवाचार कर रहे हैं। पहले किसान पारंपरिक रूप से सरसों, गेहूं, चना और प्याज की खेती पर निर्भर थे, वहीं अब वे ठंडे प्रदेशों की फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में यहां के किसानों ने स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत और लाभकारी फसल की खेती शुरू की है।

किशोरी क्षेत्र के गांव खडूकी गुवाड़ा किशोरी के राकेश कुमार मीणा ने एमए, बीएड करने के बाद खेती में नवाचार शुरू किया है। सबसे पहले राकेश ने 15 बिस्वा जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। खास बात यह है कि उन्होंने स्ट्रॉबेरी की फसल को मिर्च के खेत में लगाया है। मिर्च के साथ ही करीब 2000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए।

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अलवर में पैदा हो रही स्ट्रॉबेरी (फोटो-पत्रिका)

अन्य किसान भी हो रहे प्रेरित

किसान राकेश ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की फसल जबतक खत्म होगी, उसके बाद मिर्च से उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस तरह राकेश एक साथ दो-दो फसलें ले रहे हैं। इस नवाचार से अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल रहा है, जिससे अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

स्ट्रॉबेरी की खेती से तुरंत मुनाफा

किसान राकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने एक सामाजिक संस्था के सहयोग से कृषि तकनीक और विशेष किट की मदद लेकर खेत तैयार किया। उन्होंने बताया कि मिर्च और स्ट्रॉबेरी दोनों नकदी फसल हैं, ऐसे में इस खेती से जल्द ही मुनाफा शुरू हो जाता है।

30 हजार की आई लागत

किसान ने बताया कि एक माह से वह तैयार स्ट्रॉबेरी की तुड़ाई कर स्थानीय बाजार और मंडी में बिक्री कर रहे हैं। यह फसल अब अंतिम चरण में है। इसके बाद इसमें से मिर्च की तुड़ाई शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि 15 बिस्वा भूमि में स्ट्रॉबेरी की खेती पर लगभग 30 हजार की लागत आई। पौधे महाराष्ट्र से मंगवाए गए तथा खेत को 3 से 4 बार जुताई कर भुरभुरी मिट्टी तैयार की गई। इसके बाद 16 ट्रॉली गोबर खाद डाली गई और सल्फर सहित अन्य आवश्यक दवाइयों का उपयोग किया। नवम्बर के महीने में पन्नी और कपड़े से ढककर पौधे लगाए गए।

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अलग से मिर्च की खेती

राकेश के खेतों में लगभग 20 बिस्वा भूमि पर अलग से मिर्च की खेती की जा रही है। इससे वे प्रतिदिन लगभग 3 क्विंटल हरी मिर्च स्थानीय आढ़तियों को 15 से 18 रुपए प्रति किलो के भाव से बेच रहे हैं। इससे प्रतिदिन लगभग 5000 की आय हो रही है और आने वाले महीनों में यह मुनाफा और बढ़ने की संभावना है।

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Published on:
15 Apr 2026 05:24 pm
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