अलवर शहर में स्कीम नंबर 10-बी स्थित दीवान जी का बाग की करीब 9 बीघा जमीन पर की जा रही प्लॉटिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सवाई माधोपुर के बामनवास की विधायक इंदिरा मीणा ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
अलवर शहर में स्कीम नंबर 10-बी स्थित दीवान जी का बाग की करीब 9 बीघा जमीन पर की जा रही प्लॉटिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सवाई माधोपुर के बामनवास की विधायक इंदिरा मीणा ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
राजस्थान पत्रिका के खुलासे के बाद प्रशासन ने मामले की जांच करवाई थी। अब जांच रिपोर्ट प्रशासन ने जिला कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित भूमि मास्टर प्लान और जोनल प्लान में ग्रीनबेल्ट के रूप में दर्ज है। नियमानुसार ग्रीनबेल्ट की जमीन का भू-रूपांतरण नहीं किया जा सकता और न ही इस पर आवासीय पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
जांच रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए जिला कलक्टर को भेज दी गई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। दूसरी ओर, जमीन मालिक का कहना है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और भू-रूपांतरण नियमानुसार कराया गया है। अब यह मामला विधानसभा में उठने के बाद सभी के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
दरअसल, यूआइटी ने वर्ष 1980 में स्कीम नंबर 10-बी के लिए जमीन अधिग्रहित की थी। इस जमीन पर आवासीय कॉलोनी बनाने की योजना बनी, तो इस जमीन के मालिक शांतिस्वरूप जैन ने पर्यावरण हित को ध्यान में रखते हुए इस जमीन को बाग के लिए आरक्षित करवा दिया। कुछ समय बाद शांतिस्वरूप जैन का निधन हो गया। वर्ष 2019 में वार्डों का गठन हुआ, तो यह एरिया नगर निगम शांतिस्वरूप के बेटे अरुण जैन आदि ने निगम से इसका भू-रूपांतरण कराया। बताया जा रहा है कि इस समय यहां प्लॉट बेचे जा रहे है।